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छत्तीसगढ़ में बढ़ते मलेरिया मामले
छत्तीसगढ़ में बढ़ते मलेरिया मामले
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मानसून के साथ बढ़ा मलेरिया का प्रकोप, 8 हजार से ज्यादा मरीज, एनएचआरसी ने सरकार को भेजा नोटिस

मानसून के साथ मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है। प्रदेश में 8,426 से अधिक मामले सामने आए हैं। कांकेर में 13 दिनों में 5 मौतों के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।

कीर्तिमान न्यूज | अप्पू धीवर
प्रकाशित: 11 Aug 2026, 08:51 AM · अपडेट: 12 Sep 2026, 11:18 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के साथ ही मलेरिया ने स्वास्थ्य महकमे की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश भर में अब तक मलेरिया के 8,426 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। सबसे गंभीर स्थिति दूरस्थ और वनांचल इलाकों में देखने को मिल रही है, जहाँ यह बीमारी तेजी से पाँव पसार रही है। कांकेर जिले के अंदरूनी जनजातीय क्षेत्रों में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यहाँ महज 13 दिनों के भीतर मलेरिया से 5 लोगों की जान चली गई। इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और अगले चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मलेरिया का असर अब कवर्धा और बिलासपुर के ग्रामीण अंचलों तक फैल गया है:

  • कवर्धा: बैगा बहुल गाँव मुड़वाही और आसपास के क्षेत्रों में बीते दो हफ्तों से बुखार और संक्रमण का प्रकोप जारी है। स्वास्थ्य विभाग की जाँच में अब तक 40 से 45 मरीजों में मलेरिया पाया गया है। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गाँव में 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसे विभाग ने फिलहाल आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है।

  • बिलासपुर: कोटा क्षेत्र में मलेरिया से पीड़ित एक 37 वर्षीय महिला की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, एक 17 वर्षीय छात्र की जान जाने के पीछे भी 'फाल्सीपेरम मलेरिया' का संदेह जताया जा रहा है।

कागजी आँकड़े बनाम ज़मीनी हकीकत

एक तरफ स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बीमारी के नियंत्रण में होने का दावा करते हैं, तो दूसरी तरफ धरातल की तस्वीरें इसके विपरीत कहानी बयान कर रही हैं।

वर्षवार्षिक परजीवी दर (API)मौतों की संख्या
200016.8063
20201.17-
20250.9012
सरकारी डेटा के अनुसार संक्रमण की दर लगातार घटी है, लेकिन वर्तमान में ग्रामीण वनांचलों से लगातार आ रहे मामलों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बढ़ते मामलों को देखते हुए वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य अमले को सक्रिय कर दिया गया है। रोकथाम के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

  • घर-घर जाकर मलेरिया की रैपिड स्क्रीनिंग।

  • मरीजों को मौके पर ही दवाइयों का वितरण।

  • ग्रामीणों को बचाव और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए शिविरों का आयोजन।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान: 
"प्रदेश के सभी प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग को संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए सघन जाँच के निर्देश दिए गए हैं। जहाँ भी मामले सामने आ रहे हैं, वहाँ तत्काल इलाज की व्यवस्था की जा रही है।" -श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़
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