Health Tips: त्योहारों में मिठाइयों के साथ रंग-बिरंगे ड्रिंक्स का स्वाद लेना आम बात है। पार्टी हो या पारिवारिक आयोजन, मॉकटेल, पैकेज्ड जूस और फ्लेवर्ड बेवरेजेज अक्सर मेहमानों की पसंद बन जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये ड्रिंक्स आपकी रोजाना की शुगर इनटेक को काफी बढ़ा सकते हैं? अक्सर लोग मिठाई और डेजर्ट में मौजूद चीनी का हिसाब तो रखते हैं, लेकिन पेय पदार्थों में छिपी शुगर पर ध्यान नहीं देते। जबकि कई पैकेज्ड ड्रिंक्स और मॉकटेल्स में एडेड शुगर, फ्लेवर सिरप और फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में स्वाद के चक्कर में अनजाने में जरूरत से ज्यादा चीनी शरीर में पहुंच सकती है।
मॉकटेल और पैकेज्ड ड्रिंक्स में छिपी होती है ज्यादा शुगर
फेस्टिव सीजन में पार्टियों और समारोहों में परोसे जाने वाले मॉकटेल्स देखने में भले ही आकर्षक लगें, लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर ध्यान देना जरूरी है। कई ड्रिंक्स में फ्लेवर सिरप, स्वीट सोडा, फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट और अलग-अलग तरह के स्वीटनर्स मिलाए जाते हैं। सिर्फ फ्रूट बेस्ड या नेचुरल लिखा होने से कोई ड्रिंक सेहतमंद नहीं हो जाता। पैकेज्ड फ्रूट जूस में भी काफी मात्रा में शुगर हो सकती है। यही बात घर पर तैयार होने वाले मॉकटेल्स पर भी लागू होती है। जरूरत से ज्यादा शहद, सिरप या मीठे मिक्सर का इस्तेमाल इनकी शुगर मात्रा बढ़ा सकता है।
मीठे ड्रिंक्स से तेजी से बढ़ सकता है ब्लड शुगर लेवल
शुगर युक्त पेय पदार्थों का असर ब्लड ग्लूकोज पर भी पड़ सकता है। इनमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर में तेजी से अवशोषित होते हैं, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। फलों और उनके जूस के बीच भी एक बड़ा अंतर है। साबुत फलों में मौजूद फाइबर पाचन की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है और पेट भरा होने का एहसास देता है। इसके विपरीत, जूस में फाइबर काफी कम होता है। एक गिलास जूस में कई फलों की शुगर शामिल हो सकती है, लेकिन इसे पीने के बाद उतनी देर तक पेट भरा महसूस नहीं होता।डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोग रखें खास ध्यान
डायबिटीज, प्रीडायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस से परेशान लोगों को मीठे पेय पदार्थों के सेवन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बार-बार शुगर वाले ड्रिंक्स पीने से ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है। मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए भी इनका अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। मीठे पेय पदार्थों से शरीर को अतिरिक्त कैलोरी मिलती है, जिससे लंबे समय में वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, कभी-कभार कोई मीठी ड्रिंक पी लेने से डायबिटीज नहीं होती। इस बीमारी के जोखिम में खानपान, शारीरिक गतिविधि, आनुवंशिक कारण और जीवनशैली जैसे कई कारक शामिल होते हैं।
WHO के मुताबिक, रोजाना कितनी चीनी लेना है सही?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने फ्री शुगर के सेवन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। संगठन के मुताबिक, किसी व्यक्ति की कुल दैनिक कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा फ्री शुगर से आना चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए इसे 5 प्रतिशत से भी कम रखने की सलाह दी गई है। अगर कोई व्यक्ति रोजाना करीब 2,000 कैलोरी लेता है, तो उसके लिए फ्री शुगर की मात्रा 50 ग्राम से कम और आदर्श रूप से 25 ग्राम से कम होनी चाहिए। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि फ्री शुगर में केवल ऊपर से मिलाई गई चीनी ही शामिल नहीं होती। शहद, सिरप, फ्रूट जूस और फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट में मौजूद शुगर भी इसी श्रेणी में आती है।ड्रिंक खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें
- Total Sugar: एक सर्विंग में कितनी कुल शुगर मौजूद है, यह जरूर देखें।
- Serving Size: बोतल में कितनी सर्विंग हैं, इसकी जानकारी लें। पूरी बोतल पीने पर शुगर की मात्रा बढ़ सकती है।
- Ingredients: ग्लूकोज सिरप, सुक्रोज, फ्रक्टोज, माल्टोज और फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट जैसे घटकों पर नजर रखें।
- Added Sugar: देखें कि पेय पदार्थ में अलग से कितनी चीनी मिलाई गई है।
- Low Sugar: संभव हो तो बिना चीनी या कम चीनी वाले पेय पदार्थ चुनें।












