Mental Health Awareness: सुबह उठते ही एक अजीब सा खिंचाव, काम में बिल्कुल मन न लगना और आने वाले कल को लेकर कोई उम्मीद न होना, यह सिर्फ आपकी या किसी एक की कहानी नहीं है, बल्कि आज के दौर के लाखों युवाओं की रोज़मर्रा की हकीकत बन चुकी है। हाल ही में दुनिया के 92 देशों के 50,000 से ज्यादा लोगों पर किए गए एक बड़े अध्ययन ने इस कड़वी सच्चाई पर मुहर लगा दी है। सोशल इंडिकेटर्स रिसर्च जर्नल में छपी इस रिसर्च के मुताबिक, आज की युवा पीढ़ी भीतर से खुद को बहुत खाली और थका हुआ महसूस कर रही है। हैरानी की बात यह है कि पिछली पीढ़ियों के मुकाबले आज के युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य का स्तर काफी नीचे गिर गया है।
आखिर कहां से आ रहा है यह खालीपन?
इस वैश्विक अध्ययन से यह साफ हुआ है कि मामला सिर्फ भविष्य की अनिश्चितता का नहीं है, बल्कि युवा वर्तमान में ही मानसिक रूप से बुरी तरह जूझ रहे हैं। रिसर्च में पाया गया कि युवाओं में जीवन शक्ति (Vitality), भावनात्मक स्थिरता और मुश्किल वक्त से पार पाने की क्षमता (Resilience) जैसी बुनियादी खूबियां तेजी से कम हो रही हैं। पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर का कहना है कि यह स्थिति किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ युवाओं या आर्थिक तंगी से जूझ रहे कुछ लोगों का सवाल नहीं है, बल्कि पूरी आबादी यह महसूस कर रही है कि अब उनकी सहनशक्ति जवाब दे रही है।
बाहरी दुनिया का तनाव और भीतर का डर
दिलचस्प बात यह है कि जब लोग अपनी निजी जिंदगी और अनुभवों के बारे में सोचते हैं, तो वे उन्हें काफी हद तक सकारात्मक पाते हैं। लेकिन जैसे ही वे अपने नियंत्रण से बाहर की चीजों—जैसे राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक अस्थिरता या वैश्विक संकट—के बारे में सोचते हैं, उनका तनाव और डर कई गुना बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े 10 अहम सवाल पूछे थे। इनमें खुद की काबिलियत पर भरोसा, आशावाद, आत्मसम्मान, सकारात्मक भावनाएं और ऊर्जा जैसे पहलू शामिल थे। इसके अलावा तनाव, अवसाद और कुल संतुष्टि को भी परखा गया। नतीजों में सामने आया कि युवाओं का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जबकि नौकरीपेशा लोग भी इस मानसिक थकान से अछूते नहीं हैं।
अब सिर्फ कागजी दावों से काम नहीं चलेगा
प्रोफेसर रुगेरी साफ कहते हैं कि अब नेताओं और नीति-निर्माताओं को सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ी-बड़ी बातें करने या ऊपरी तौर पर बजट दिखाने से काम नहीं चलेगा। आज जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
इनमें सबसे अहम मुद्दे हैं:
- नौकरी की सुरक्षा: एआई (AI) और ऑटोमेशन के दौर में युवाओं के मन में नौकरियों के खत्म होने का जो डर बैठा है, उसे दूर करना।
- मानसिक थकान के कारणों पर वार: कामकाजी उम्र के लोगों पर पड़ रहे अत्यधिक मानसिक दबाव के असली कारणों को पहचानना और उन्हें कम करना।
- भरोसा जगाना: युवाओं के मन में भविष्य के अवसरों को लेकर आत्मविश्वास पैदा करना।







