Brain Stroke Symptoms: स्ट्रोक या ब्रेन अटैक किसी भी इंसान की ज़िंदगी को पल भर में बदल कर रख देता है। इसका असर सिर्फ उस मरीज़ पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरा परिवार और तीमारदार भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। मेडिकल भाषा में समझें तो स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून का बहाव रुक जाए या फिर दिमाग की कोई नस फट जाए। वैसे तो यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा काफी बढ़ जाता है, क्योंकि बुजुर्गों की नसें कमोबेश कमज़ोर होने लगती हैं। आज के समय में भारत में स्ट्रोक विकलांगता के सबसे बड़े कारणों में शुमार है। जिस तेजी से इसके मामले बढ़ रहे हैं और इसका बोझ परिवारों व स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है, उसे देखते हुए इसके छिपे हुए कारणों को जानना बेहद जरूरी हो गया है।
स्ट्रोक के जाने-पहचाने और छुपे हुए कारण
अब तक हम यही जानते आए हैं कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ता कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग या बिल्कुल सुस्त जीवनशैली स्ट्रोक की मुख्य वजहें हैं। इन पर खुलकर चर्चा भी होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसी चीज़ें भी हैं जिन पर हमारा ध्यान अमूमन नहीं जाता, मगर वे भी स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं, मेडिकल रिसर्च और सबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कुछ खास वायरल इन्फेक्शन भी स्ट्रोक के खतरे को हवा दे सकते हैं। इनमें इन्फ्लूएंजा (फ्लू) और शिंगल्स जैसे संक्रमण प्रमुख हैं। दरअसल, जब शरीर में कोई वायरल इन्फेक्शन होता है, तो अंदरूनी सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ जाती है और खून के थक्के (ब्लड क्लॉट्स) जमने का तरीका प्रभावित होता है, जो अंततः स्ट्रोक का खतरा पैदा कर सकता है।
शिंगल्स और स्ट्रोक का गहरा नाता
शिंगल्स (Shingles) एक ऐसी तकलीफदेह समस्या है जो उसी 'वेरीसेला-जोस्टर' वायरस के दोबारा एक्टिव होने से होती है जिससे बचपन में चिकनपॉक्स हुआ था। चिकनपॉक्स ठीक होने के बाद यह वायरस शरीर में सुप्त (dormant) अवस्था में छिपा रहता है। आगे चलकर जब इम्युनिटी कमज़ोर होती है, तो यह फिर से सिर उठा लेता है और शिंगल्स का रूप ले लेता है। ज्यादातर लोग शिंगल्स को सिर्फ त्वचा पर होने वाले दर्दनाक चकत्तों (रैश) तक ही सीमित मानते हैं, लेकिन सच यह है कि इसका असर स्किन से कहीं ज्यादा गहरा होता है। यह वायरस दिमाग की छोटी और बड़ी रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) को नुकसान पहुंचा सकता है।50 की उम्र पार कर चुके लोग कैसे रखें अपना ख्याल?
- भीड़-भाड़ में सावधानी: ऐसी जगहों पर जाने से बचें या मास्क का इस्तेमाल करें जहां संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा हो।
- देरी न करें: शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और समय पर जांच करवाएं।
- वैक्सीनेशन और लाइफस्टाइल: अपने डॉक्टर से खुलकर चर्चा करें कि आपकी सेहत के हिसाब से कौन-सी जीवनशैली, खान-पान और प्रिवेंटिव वैक्सीन (बचाव के टीके) सही रहेंगी।







