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Discrepancies revealed in cancer screening data (Image Source: Social Media)
Discrepancies revealed in cancer screening data (Image Source: Social Media)
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CG Health Department: कैंसर स्क्रीनिंग के आंकड़ों में गड़बड़ी, 2 साल की बच्चियों की जांच का रिकॉर्ड मिला

CG Health Department: छत्तीसगढ़ में कैंसर स्क्रीनिंग अभियान के सरकारी आंकड़ों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में दो साल की बच्चियों की ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर जांच दर्ज मिली, जबकि सुकमा में एक मोबाइल नंबर पर 1,382 जांचें दर्ज होने का मामला भी सामने आया है।

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प्रकाशित: 03 Nov 2026, 01:47 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
CG Health Department: छत्तीसगढ़ में कैंसर की समय पर पहचान के लिए चलाए जा रहे स्क्रीनिंग अभियान के आंकड़ों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। स्वास्थ्य विभाग की प्रदर्शन रिपोर्ट में ऐसे मामले दर्ज मिले हैं, जिन पर भरोसा करना मुश्किल है। रिकॉर्ड के मुताबिक, दो साल तक की बच्चियों की ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग किए जाने की जानकारी दर्ज है। मामला सामने आने के बाद विभागीय डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

एक मोबाइल नंबर पर सैकड़ों-हजारों जांच दर्ज

स्क्रीनिंग के आंकड़ों में मोबाइल नंबर से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सुकमा जिले में एक ही मोबाइल नंबर पर 1,382 लोगों की जांच दर्ज की गई है। वहीं, बीजापुर में एक नंबर से 263 जांचें दर्ज होने की जानकारी मिली है। रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आई हैं। यहां कैंसर स्क्रीनिंग का काम सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की देखरेख में होता है। इसके बाद संबंधित आंकड़े जिला मुख्यालय भेजे जाते हैं, जहां जिला डेटा मैनेजर उनकी जांच कर राज्य स्तर पर रिपोर्ट भेजते हैं।

दो साल की बच्चियों की ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, दुर्ग जिले के धमधा, कबीरधाम के कुकदुर और सरगुजा के अंबिकापुर में दो साल तक की बच्चियों की ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर जांच का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। हैरानी की बात यह है कि कुछ जगहों पर एक साल के बच्चे की ओरल कैंसर स्क्रीनिंग किए जाने की जानकारी भी सरकारी आंकड़ों में दर्ज मिली है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इन तीनों प्रकार के कैंसर की स्क्रीनिंग 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए निर्धारित है। ऐसे में कम उम्र के बच्चों की जांच दर्ज होने से अभियान के तहत तैयार किए जा रहे आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

डेटा की जांच के लिए कई स्तरों पर जिम्मेदारी

स्क्रीनिंग के आंकड़ों की निगरानी की जिम्मेदारी केवल CHO तक सीमित नहीं है। जिला डेटा मैनेजर के अलावा जिला नोडल अधिकारी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) भी इसकी जांच के लिए जिम्मेदार हैं। मामले में दुर्ग जिले के नोडल अधिकारी ने धमधा क्षेत्र के आंकड़ों में गड़बड़ी स्वीकार की है। संबंधित कर्मचारियों को डेटा सुधारने के लिए नोटिस जारी करने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, अन्य जिलों में सामने आई अनियमितताओं को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान में इस तरह की डेटा संबंधी गड़बड़ियां स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। अब यह देखना अहम होगा कि विभाग इन आंकड़ों की दोबारा जांच कराता है या नहीं और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।
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