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Ayushman Bharat Scheme: 11 निजी अस्पताल डि-इम्पेनल्ड, मरीजों के इलाज पर लगी रोक, जुर्माना भी तय
Ayushman Bharat Scheme: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में अनियमितताओं की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ने 11 निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की है। राज्य स्तरीय जांच टीम के निरीक्षण और अस्पतालों से मिले जवाबों की समीक्षा के बाद इन अस्पतालों का पंजीयन एक से तीन साल तक के लिए निरस्त कर दिया गया है। अब इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के जरिए मरीजों का इलाज नहीं हो सकेगा। विभाग ने संबंधित अस्पतालों पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की है।
Ayushman Bharat Scheme: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने और आयुष्मान भारत योजना में हो रही धांधली पर लगाम कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के विभिन्न जिलों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कुल 11 निजी अस्पतालों को इस योजना से बाहर (डि-इम्पेनल्ड) कर दिया है। इन अस्पतालों में अब
आयुष्मान कार्ड के जरिए मरीजों का इलाज नहीं हो सकेगा। इतना ही नहीं, विभाग ने इन सभी अस्पतालों पर भारी जुर्माना लगाने की भी पूरी तैयारी कर ली है, जिसकी कागजी प्रक्रिया इस वक्त तेजी से चल रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि इस सख्त कार्रवाई का मुख्य मकसद मरीजों के हक की इस योजना में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत प्रभाव से रोकना है।
कैसे खुला राज? शिकायतों पर हुई थी औचक छापेमारी
जानकारों के मुताबिक, यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि आयुष्मान भारत योजना के नाम पर मरीजों के इलाज में नियमों की अनदेखी की जा रही है और बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां चल रही हैं। इन
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक उच्च-स्तरीय राज्य स्तरीय जांच दल का गठन किया था। इसी जांच टीम ने बीते 30 सितंबर को राजधानी रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कवर्धा, कोंडागांव और कोरबा के कई निजी अस्पतालों में औचक निरीक्षण (सरप्राइज विजिट) किया था।
निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दिए जा रहे इलाज की गुणवत्ता, वहां मौजूद मेडिकल सुविधाओं और इलाज से जुड़े तमाम दस्तावेजों की बारीकी से छानबीन की थी। गड़बड़ी मिलने के तुरंत बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी संदिग्ध अस्पतालों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा था। हालांकि, इन अस्पतालों की तरफ से जो स्पष्टीकरण दिए गए, वे विभाग के अधिकारियों को संतुष्ट करने के लिए नाकाफी साबित हुए, जिसके बाद यह गाज गिरी है।
किन-किन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई? देखें पूरी लिस्ट
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत अलग-अलग अस्पतालों का पंजीयन एक से तीन साल तक के लिए निरस्त किया गया है:
पल्स हास्पिटल, नेहरूनगर, भिलाई – 3 साल के लिए निरस्त
श्री अनंत साई हास्पिटल, तेलीबांधा, रायपुर – 3 साल के लिए निरस्त
वरदान हास्पिटल, शंकर नगर, रायपुर – 3 साल के लिए निरस्त
एसआरआइएमएसआर श्री रावतपुरा सरकार हास्पिटल, अभनपुर, रायपुर – 3 साल के लिए निरस्त
श्रीनिवास हास्पिटल, एकता नगर, रायपुर – 3 साल के लिए निरस्त
स्वामी चंद्रशेखरानंद अस्पताल, जगदलपुर – 3 साल के लिए निरस्त
अशोक प्रसूति मंदिर, देवकीनंदन चौक, बिलासपुर – 1 साल के लिए निरस्त
जय जगन्नाथ हास्पिटल, प्रोफेसर कालोनी, कवर्धा – 1 साल के लिए निरस्त
एसके केयर हास्पिटल, पचपेड़ी नाका, रायपुर – 1 साल के लिए निरस्त
श्री महावीर हास्पिटल, दानी विला, शंकर नगर, रायपुर – 1 साल के लिए निरस्त
सुयश इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस प्रा. लि., कोटा, रायपुर – 1 साल के लिए निरस्त
आगे क्या?
स्वास्थ्य विभाग के इस कड़े कदम से निजी अस्पतालों के संचालकों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का संकेत है कि अगर भविष्य में भी इस तरह की अनियमितताएं पाई गईं, तो अस्पतालों का लाइसेंस रद्द करने जैसी और भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उन्हें आयुष्मान योजना के तहत इलाज में किसी भी प्रकार की परेशानी या अवैध वसूली की शिकायत हो, तो वे बेझिझक विभाग को सूचित करें।