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सतीश जैन को कीर्तिमान अवार्ड से किया सम्मानित
सतीश जैन को कीर्तिमान अवार्ड से किया सम्मानित
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गाइए और छा जाइए : छॉलीवुड को नई पहचान देने वाले सतीश जैन को कीर्तिमान अवार्ड, क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई अलग पहचान

प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक, लेखक और निर्माता सतीश जैन को कीर्तिमान मीडिया द्वारा कीर्तिमान अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, भाषा और परंपराओं को सिनेमा के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 11 Jun 2026, 12:28 PM · अपडेट: 01 Oct 2026, 11:15 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई दिशा देने वाले प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक, लेखक और निर्माता सतीश जैन को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए कीर्तिमान मीडिया द्वारा कीर्तिमान अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, बोली, परंपराओं और सामाजिक जीवन को सिनेमा के माध्यम से नई पहचान दिलाने के लिए प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह में कीर्तिमान मीडिया के संस्थापक डॉ. नीरज गजेंद्र ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग जिस मुकाम पर पहुंचा है, उसमें सतीश जैन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने ऐसे दौर में क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊर्जा दी, जब छत्तीसगढ़ी फिल्मों का निर्माण लगभग ठहर गया था। उनकी फिल्मों ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को भी देशभर में पहचान दिलाई।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

भानुप्रतापपुर के एक साधारण परिवार में जन्मे सतीश जैन का बचपन छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और लोकजीवन के बीच बीता। बचपन से ही उन्हें फिल्मों और कहानी लेखन में विशेष रुचि थी। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उनका मन रचनात्मक कार्यों में अधिक रमा। शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, दुर्ग से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में करियर बनाने का निर्णय लिया। अपने सपनों को साकार करने के लिए वे मुंबई पहुंचे। वहां शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक और पेशेवर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पत्रकारिता, पटकथा लेखन और सहायक निर्देशन के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझा और खुद को एक कुशल फिल्मकार के रूप में तैयार किया।

मोर छैइंया भुइंया ने बदल दी छत्तीसगढ़ी सिनेमा की तस्वीर

साल 2000 में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘मोर छैइंया भुइंया’ छत्तीसगढ़ी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। उस समय क्षेत्रीय फिल्मों का निर्माण बेहद सीमित था, लेकिन इस फिल्म की अभूतपूर्व सफलता ने पूरे उद्योग में नई जान फूंक दी। फिल्म में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और लोकजीवन को जिस संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया। फिल्म की सफलता के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में तेजी आई और छॉलीवुड को नई पहचान मिली। सिनेमा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फिल्म छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग के पुनर्जागरण की शुरुआत थी।

एक के बाद एक दी कई सुपरहिट फिल्में

‘मोर छैइंया भुइंया’ की सफलता के बाद सतीश जैन ने कई लोकप्रिय फिल्में दीं। इनमें झन भूलो माँ-बाप ला, लैला टिप टॉप छैला अंगूठा छाप, हंस झन पगली फंस जाबे, चल हट कोनो देख लिही, मोर छैइंया भुइंया-2 और ले सुरू होगे मया के कहानी जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों ने दर्शकों के बीच छत्तीसगढ़ी सिनेमा की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

भोजपुरी सिनेमा में भी छोड़ी छाप

सतीश जैन ने अपनी प्रतिभा का दायरा केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने भोजपुरी फिल्म उद्योग में भी सफलता हासिल की। उनके निर्देशन में बनी फिल्म ‘निरहुआ हिंदुस्तानी’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इस सफलता ने साबित किया कि वे केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी फिल्मकार हैं।

संस्कृति के संरक्षण का माध्यम बना सिनेमा

सतीश जैन की फिल्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं। उनकी फिल्मों में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, लोकगीत, पारिवारिक संबंध, सामाजिक सरोकार और ग्रामीण जीवन की झलक साफ दिखाई देती है। यही कारण है कि उन्हें केवल एक सफल निर्देशक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और आगे बढ़ाने वाले सृजनशील फिल्मकार के रूप में देखा जाता है।

सम्मान ने बढ़ाया प्रदेश का गौरव

कीर्तिमान अवार्ड प्राप्त करने के बाद सतीश जैन ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, भाषा और संस्कृति ने उन्हें हमेशा नई कहानियां दी हैं और वे आगे भी इसी मिट्टी की खुशबू को सिनेमा के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे। कीर्तिमान मीडिया द्वारा दिया गया यह सम्मान न केवल सतीश जैन के रचनात्मक योगदान का सम्मान है, बल्कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा की उस यात्रा का भी सम्मान है, जिसने क्षेत्रीय फिल्मों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम किया।
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