GDP Growth Rate: दुनिया भर में आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक खबर सामने आई है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। यह भारत के लिए एक हफ्ते में आई दूसरी बड़ी आर्थिक राहत है। इससे पहले Moody’s Ratings ने भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी की थी।
S&P Global Ratings ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी के मुताबिक, जून तिमाही में उद्योग, घरेलू खपत, निर्यात और सरकारी निवेश का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा, जिसके चलते अनुमान में सुधार किया गया। इससे पहले 18 सितंबर को Moody’s ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया था।
G20 देशों में सबसे तेज रह सकती है भारत की विकास दर
S&P के नए अनुमान के मुताबिक भारत की 7 प्रतिशत की विकास दर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रहने की उम्मीद है। यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6.7 प्रतिशत और Fitch Ratings के 6.4 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है।
आने वाले वर्षों में भी मजबूत विकास का अनुमान
S&P Global Ratings को उम्मीद है कि भारत की आर्थिक वृद्धि आने वाले वर्षों में भी स्थिर बनी रहेगी। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2028 में 7.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 में 7 प्रतिशत की GDP ग्रोथ का अनुमान जताया है। वित्त वर्ष 2027 के अनुमान में 0.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की गई है, जबकि अगले दो वर्षों के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
जून तिमाही में अर्थव्यवस्था ने दर्ज की 7.8% ग्रोथ
S&P की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि यह पिछली तिमाही के 8.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम रही, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। एजेंसी का मानना है कि भारत की मजबूत ग्रोथ ने उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को भी सहारा दिया है।महंगाई को लेकर S&P का अनुमान
आर्थिक विकास के साथ महंगाई पर भी S&P ने अपना अनुमान जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में औसत उपभोक्ता महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रह सकती है।
वहीं वित्त वर्ष 2028 में महंगाई घटकर 4.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 में 4.3 प्रतिशत तक आने का अनुमान लगाया गया है।
दूसरी छमाही में धीमी हो सकती है विकास की रफ्तार
S&P का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में आर्थिक विकास की गति कुछ धीमी पड़ सकती है। इसकी वजह GST दरों में बदलाव और आयकर कटौती से मिलने वाले शुरुआती लाभ का कम होना बताया गया है। हालांकि, एजेंसी का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी रहेगी।मौसम और कृषि क्षेत्र पर रहेगी नजर
S&P ने मौसम को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख जोखिम बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, 9 सितंबर तक देश में बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम रही है। कम बारिश का असर कृषि उत्पादन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई और ग्रामीण मांग पर विशेष नजर रखने की जरूरत होगी।
महंगाई के कारण RBI बढ़ा सकता है ब्याज दर
S&P के अनुसार, महंगाई के दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक वित्त वर्ष 2027 में नीतिगत ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी कर सकता है। एजेंसी का अनुमान है कि RBI की रेपो रेट वित्त वर्ष 2026 के 5.25 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 के अंत तक 5.5 प्रतिशत हो सकती है। इसके बाद यह दर वित्त वर्ष 2029 तक 5.5 प्रतिशत पर बनी रह सकती है और वित्त वर्ष 2030 में घटकर 5.25 प्रतिशत तक आ सकती है।

