Retail Inflation: भारत में खुदरा महंगाई दर में अगस्त 2026 के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 4.82% हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45% थी। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और उपभोक्ता टोकरी के अन्य जरूरी हिस्सों में दबाव इसकी मुख्य वजह रहे।
इस साल की शुरुआत में महंगाई दर काफी हद तक नियंत्रण में रही थी, लेकिन अब कीमतों में दोबारा दबाव दिखाई देने लगा है। अगस्त की महंगाई दर अर्थशास्त्रियों के अनुमान के करीब रही है। रॉयटर्स के सर्वे में विशेषज्ञों ने अगस्त के लिए खुदरा महंगाई दर 4.80% रहने का अनुमान जताया था, जिसमें अनुमान 4.40% से 5.05% के बीच थे।
आरबीआई के लक्ष्य के करीब पहुंची महंगाई
जून 2026 में खुदरा महंगाई दर मई के 3.93% से बढ़कर 4.38% हो गई थी, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर थी। अगस्त में दर्ज 4.82% महंगाई दर इस साल की शुरुआत में नई बेस ईयर और संशोधित उपभोक्ता टोकरी लागू होने के बाद सबसे अधिक स्तर पर पहुंच गई है। RBI को वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई दर को करीब 5% के आसपास बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
चीनी की कीमतों में तेजी से बढ़ा दबाव
अगस्त महीने में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, जिसका असर महंगाई के आंकड़ों पर पड़ा। घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था, जो मई से लागू है और सितंबर के अंत तक जारी रहने की संभावना है।खाद्य महंगाई दर 5.95% पर पहुंची
खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर अगस्त में बढ़कर 5.95% हो गई, जबकि जुलाई में यह 5.52% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर 5.64% और शहरी क्षेत्रों में 6.13% दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में महंगाई का रुख मानसून और कृषि उत्पादन पर निर्भर करेगा। सामान्य बारिश से फसलों का उत्पादन बेहतर रहने और कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
आरबीआई ने महंगाई अनुमान में की कटौती
महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने यह बदलाव कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और सप्लाई से जुड़ी समस्याओं में कमी को देखते हुए किया।कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चुनौती
भारत के लिए वैश्विक ऊर्जा कीमतें भी महंगाई का एक बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो ईंधन और परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा चालू खाता घाटे पर दबाव और रुपये में कमजोरी आने से आयातित महंगाई बढ़ने की संभावना रहती है।
तिमाही महंगाई अनुमान में भी बदलाव
RBI ने अलग-अलग तिमाहियों के लिए महंगाई अनुमान में भी संशोधन किया है। पहली तिमाही (Q1) के लिए CPI महंगाई अनुमान को 4.2% से घटाकर 4.1% किया गया है। वहीं दूसरी तिमाही (Q2) के अनुमान को 5.1% से घटाकर 4.7% कर दिया गया है। तीसरी तिमाही (Q3) के लिए अनुमान 5.9% पर बरकरार रखा गया है, जबकि चौथी तिमाही (Q4) के अनुमान को मामूली बढ़ाकर 5.5% कर दिया गया है।

