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Gen Z and Dynastic Politics in Indian Politics (social media)
Gen Z and Dynastic Politics in Indian Politics (social media)
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Gen Z Politics in India: युवा राजनीति का कड़वा सच, बिना नेपोटिज्म के संसद पहुंचे नेता ढूंढना मुश्किल, आंकड़े दे रहे गवाही

Gen Z Politics in India: देश की संसद और विधानसभाओं में 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 384 जनप्रतिनिधि हैं। इनमें करीब 38 प्रतिशत नेता राजनीतिक परिवारों से आते हैं, जबकि Gen Z के केवल 26 निर्वाचित प्रतिनिधि मौजूद हैं।

कीर्तिमान न्यूज
27 Aug 2026, 12:45 PM
राजनीति डेस्क
Gen Z Politics in India: हालिया जनांदोलनों के बाद जब देश में Gen Z की राजनीतिक भूमिका पर बहस छिड़ी, तो सबसे बड़ा सवाल यही था—क्या यह युवा पीढ़ी अब देश की सत्ता की कमान संभालने को तैयार है? जवाब मिला-जुला है, लेकिन जब देश की संसद और विधानसभाओं की ज़मीनी हक़ीकत पर नज़र डालते हैं, तो तस्वीर कुछ और ही बयां करती है। हक़ीकत यह है कि युवा चेहरा चाहे कितना भी नया हो, उसके पीछे का नाम अक्सर वही पुराना और रसूखदार राजनीतिक परिवार ही होता है। एक ताज़ा रिपोर्ट के आंकड़ों ने इस पर मुहर लगा दी है। 

राजनीति थाली में परोसकर मिली 

देश की संसद और तमाम विधानसभाओं को मिलाकर 40 साल या उससे कम उम्र के कुल 384 जनप्रतिनिधि हैं। लेकिन इनमें से करीब 38 फीसदी (145 नेता) ऐसे हैं, जिन्हें राजनीति थाली में परोसकर मिली है। यानी आम परिवार से आने वाले युवाओं के लिए राजनीति के दरवाज़े अब भी उतने ही तंग हैं, जितने बरसों पहले थे।
  • Gen Z का रिपोर्ट कार्ड: संसद और विधानसभाओं में Gen Z (1997 के बाद जन्मे युवा) की नुमाइंदगी नाममात्र की है। देश भर में इस पीढ़ी के महज़ 26 निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिनमें से 13 सीधे राजनीतिक घरानों से आते हैं।

  • लोकसभा की तस्वीर: संसद के निचले सदन में Gen Z के कुल 6 सांसद हैं, और हैरानी की बात यह है कि इनमें से 5 सांसद राजनीतिक विरासत वाले हैं।

  • राज्य विधानसभाएं: 20 Gen Z विधायकों में से 8 विधायकों की पारिवारिक पृष्ठभूमि पूरी तरह से राजनीतिक रही है।

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    Gen Z के लिए टिकट मिलना एक बड़ी चुनौती

    इस सिक्के का एक पहलू यह भी है कि कानूनन लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 25 साल होना अनिवार्य है। ऐसे में Gen Z का एक बड़ा हिस्सा तो फिलहाल चुनावी दौड़ में शामिल होने के योग्य ही नहीं है। लेकिन जो योग्य हैं, उनके लिए भी बिना किसी पारिवारिक 'गॉडफादर' के टिकट पाना और जीतना लोहे के चने चबाने जैसा है। 

    अधिकतर की पहचान उनके पारिवारिक रसूख से 

    लोकसभा में 40 या उससे कम उम्र के 40 सांसद मौजूद हैं, जिनमें 11 महिला सांसद भी शामिल हैं। लेकिन इनमें से भी अधिकतर चेहरों की पहचान उनके पारिवारिक रसूख से जुड़ी है। राज्यों की बात करें तो देश की 31 विधानसभाओं में 40 की उम्र तक के 344 विधायक हैं, जिनमें से 121 (लगभग 35%) राजनीतिक परिवारों के चिराग हैं। मध्य प्रदेश का ही उदाहरण लें, तो कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह जैसे युवा नेता लंबे समय से सक्रिय हैं, लेकिन वे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे हैं। 

    भारतीय राजनीति ताकतवर के हाथों में 

    ऐसे दर्जनों उदाहरण हर राज्य में मिल जाएंगे। साफ है कि भाषणों में भले ही युवाओं को आगे लाने की बड़ी-बड़ी बातें की जाएं, लेकिन हकीकत यही है कि भारतीय राजनीति की चाबी आज भी चंद ताकतवर परिवारों के हाथों में ही घूम रही है।
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