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जनरल अनिल चौहान को सैन्य सेवा से सम्मानपूर्ण विदाई
जनरल अनिल चौहान को सैन्य सेवा से सम्मानपूर्ण विदाई
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जनरल अनिल चौहान : भावुक विदाई, बोले- आखिरी बार वर्दी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया

देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को चार दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर को अलविदा कहा। नई दिल्ली में उन्हें त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। विदाई समारोह के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि वर्दी में यह उनका अंतिम पुष्पचक्र अर्पण था।

कीर्तिमान नेटवर्क
30 May 2026, 02:13 PM
नई दिल्ली
भारतीय सशस्त्र बलों के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को अपने शानदार सैन्य करियर को औपचारिक रूप से विराम दे दिया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें थल सेना, नौसेना और वायु सेना की ओर से संयुक्त रूप से त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने उनकी सेवाओं को याद करते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि

विदाई समारोह के बाद जनरल अनिल चौहान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे, जहां उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भावुक नजर आए जनरल चौहान ने कहा, "मेरे लिए यह गर्व और सम्मान की बात है कि मैं त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सेवा से विदा ले रहा हूं। आज मैंने आखिरी बार वर्दी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया है।" उन्होंने तीनों सेनाओं और मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है।

चार दशक से अधिक सफर

जनरल अनिल चौहान का सैन्य करियर चार दशक से अधिक लंबा रहा। उन्होंने भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स से अपने करियर की शुरुआत की थी और विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर उनके नेतृत्व को विशेष रूप से सराहा गया। सेना में रहते हुए उन्होंने कई अहम कमांड और स्टाफ नियुक्तियों पर काम किया। रणनीतिक मामलों की उनकी गहरी समझ और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य पदों में शामिल किया गया।

दूसरे सीडीएस की भूमिका

जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद सितंबर 2022 में जनरल अनिल चौहान को देश का दूसरा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया था। सीडीएस के रूप में उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, थिएटर कमांड की दिशा में सुधार और रक्षा आधुनिकीकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल के दौरान संयुक्त सैन्य अभियानों, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आधुनिक युद्ध रणनीतियों पर विशेष जोर दिया गया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उन्होंने भारतीय सैन्य ढांचे को अधिक एकीकृत और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने में अहम योगदान दिया।

एन.एस. राजा सुब्रमणि ने संभाला पदभार

जनरल अनिल चौहान की विदाई के साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में पदभार ग्रहण किया। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे सैन्य आधुनिकीकरण और संयुक्त कमान प्रणाली को आगे बढ़ाने के साथ-साथ बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में भारतीय सेनाओं की तैयारियों को और मजबूत करेंगे।

यादगार रहेगा योगदान

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल भारतीय सैन्य इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने न केवल तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने का प्रयास किया, बल्कि आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप सैन्य रणनीतियों को भी नई दिशा दी। उनकी विदाई केवल एक सैन्य अधिकारी के सेवानिवृत्त होने का क्षण नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों के एक महत्वपूर्ण दौर के समापन के रूप में भी देखी जा रही है। 

सैन्य कार्यकाल

जनरल अनिल चौहान का सैन्य कार्यकाल भारतीय सेना के सबसे अनुभवी और महत्वपूर्ण कार्यकालों में गिना जाता है। लगभग 40 वर्षों से अधिक की सेवा में उन्होंने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 11 गोरखा राइफल्स से जुड़े जनरल चौहान को आतंकवाद-रोधी अभियानों, सीमा सुरक्षा और रणनीतिक सैन्य नेतृत्व के लिए जाना जाता है। वे पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) भी रहे, जहां उन्होंने चीन से लगी सीमा पर सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

सितंबर 2022 में देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बनने के बाद उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने, थिएटर कमांड की दिशा में सुधार, सैन्य आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उनके कार्यकाल में संयुक्त सैन्य रणनीति, ड्रोन और नई तकनीकों के उपयोग तथा भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी फोकस किया गया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार जनरल चौहान का कार्यकाल भारतीय सशस्त्र बलों को अधिक एकीकृत, आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा।
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