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पद्मश्री सम्मान प्राप्त करते गोडबोले दंपती
पद्मश्री सम्मान प्राप्त करते गोडबोले दंपती
रायपुर

मानवता की मिसाल : अबूझमाड़ में स्वास्थ्य की अलख जगाने वाले गोडबोले दंपती को पद्मश्री

राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने छत्तीसगढ़ के डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। “डॉक्टर भैया-भाभी” के नाम से प्रसिद्ध यह दंपती पिछले 37 वर्षों से बस्तर और अबूझमाड़ के दूरस्थ आदिवासी इलाकों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। दोनों ने अब तक 1 लाख से अधिक मरीजों का निःशुल्क इलाज किया है और स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा व नशामुक्ति अभियान में अहम योगदान दिया है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने इसे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
26 May 2026, 11:30 AM
📍 रायपुर

सोमवार को राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने देश की 66 विशिष्ट हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ के चर्चित डॉक्टर दंपती डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया। बस्तर और अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में दशकों से निःस्वार्थ सेवा दे रहे इस दंपती को लोग प्यार से “डॉक्टर भैया-भाभी” के नाम से जानते हैं।

 डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी डॉ. सुनीता गोडबोले पिछले करीब 37 वर्षों से बस्तर संभाग के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। दोनों डॉक्टरों ने अपना जीवन आदिवासी और ग्रामीण समाज की सेवा को समर्पित कर दिया। महाराष्ट्र के सतारा जिले से संबंध रखने वाला यह दंपती 1990 के दशक में दंतेवाड़ा जिले के बारसूर पहुंचा था। तब से लेकर आज तक वे लगातार वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से लोगों का मुफ्त इलाज कर रहे हैं।

अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों तक पहुंचाई स्वास्थ्य सेवा

गोडबोले दंपती ने उन इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं, जहां आज भी मूलभूत सुविधाएं सीमित हैं। नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों में जाकर उन्होंने हजारों ग्रामीणों का इलाज किया। उन्होंने कुष्ठ रोग, टीबी, मलेरिया, पीलिया और कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक किया। इसके साथ ही शिक्षा, स्वच्छता और नशामुक्ति अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाई। डॉक्टर दंपती अब तक 1 लाख से अधिक मरीजों का निःशुल्क उपचार कर चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए यह दंपती किसी मसीहा से कम नहीं माना जाता। स्थानीय लोग बताते हैं कि कठिन परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद दोनों डॉक्टर कभी पीछे नहीं हटे और लगातार गांव-गांव जाकर लोगों की सेवा करते रहे।

बस्तर में ‘डॉक्टर भैया-भाभी’ के नाम से प्रसिद्ध

बस्तर और नारायणपुर क्षेत्र में लोग उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं। ग्रामीण स्नेहपूर्वक उन्हें “डॉक्टर भैया-भाभी” कहकर पुकारते हैं। उनकी सादगी, समर्पण और सेवा भावना ने उन्हें जनजातीय समाज के बीच विशेष पहचान दिलाई है।

पद्मश्री सम्मान मिलने पर मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने भी गोडबोले दंपती को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बस्तर के सुदूर जनजातीय क्षेत्रों में दशकों से निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा देना मानवता की अद्भुत मिसाल है और यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो समाज सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं।

सेवा, समर्पण और मानवता की प्रेरक कहानी

डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले की कहानी केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता, त्याग और सामाजिक समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है। दुर्गम जंगलों और कठिन परिस्थितियों में रहकर आदिवासी समाज की सेवा करने वाले इस दंपती का पद्मश्री से सम्मानित होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण माना जा रहा है।
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