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ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान बना मिसाल, कम जमीन में बड़ा मुनाफा

मुंगेली जिले के किसान बसदेव राजपूत ने 1 एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर आधुनिक तकनीकों (ड्रिप इरिगेशन व मल्चिंग) की मदद से करीब 1.95 लाख रुपये की आय अर्जित की। लगभग 62 हजार की लागत के बाद उन्हें 1.33 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। सरकारी अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन से उनकी खेती सफल रही, जिससे आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।

ग्राफ्टेड बैंगन की खेती  की खेती करते किसान
ग्राफ्टेड बैंगन की खेती की खेती करते किसान
कीर्तिमान ब्यूरो
08 Apr 2026, 12:40 PM
📍 मुंगेली

छत्तीसगढ़ में खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में शासन की योजनाएं अब जमीनी स्तर पर असर दिखा रही हैं। मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम खुटेरा के किसान बसदेव राजपूत ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर सीमित भूमि में उल्लेखनीय आय अर्जित कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

करीब 1.70 हेक्टेयर भूमि के स्वामी श्री राजपूत ने अपनी कुल जमीन में से लगभग 1 एकड़ क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती की। उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और प्लास्टिक मल्चिंग जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाया। इससे जहां पानी की बचत हुई, वहीं फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

आधुनिक तकनीक से बढ़ा उत्पादन, घटी लागत

श्री राजपूत को शासन की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (2025-26) के तहत तकनीकी मार्गदर्शन के साथ करीब 30 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर खेती की लागत को नियंत्रित किया।

शानदार उत्पादन और आय

  • प्रति एकड़ उत्पादन: लगभग 130 क्विंटल बैंगन
  • बाजार मूल्य: ₹15–20 प्रति किलोग्राम (थोक)
  • कुल आय: करीब ₹1.95 लाख
  • कुल लागत: लगभग ₹62 हजार
  • शुद्ध लाभ: ₹1.33 लाख (एक एकड़ में)

यह लाभ पारंपरिक खेती की तुलना में काफी अधिक है, जो आधुनिक तकनीक की सफलता को दर्शाता है।

आगे और बढ़ेगी आय की उम्मीद

श्री राजपूत के अनुसार, उन्नत तकनीकों के उपयोग से न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि कीट एवं रोग नियंत्रण भी अधिक प्रभावी हुआ है। वर्तमान में फसल उत्पादन जारी है और आने वाले समय में 30 से 40 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है।

 दूसरे किसानों के लिए बनी प्रेरणा

उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान भी अब ड्रिप इरिगेशन और आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने लगे हैं। यह उदाहरण बताता है कि सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और किसान की मेहनत के समन्वय से कृषि को लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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