अन्नदाता की बढ़ी चिंता : बारिश का इंतजार, सिंचाई के लिए टैंकरों पर निर्भर हुए किसान
छत्तीसगढ़ के आरंग विकासखंड के ग्राम देवदा में मानसून की धीमी रफ्तार और कम बारिश के कारण किसान जल संकट से जूझ रहे हैं। ग्राम पंचायत द्वारा तालाब का पानी सिंचाई के लिए देने से इनकार किए जाने के बाद किसान किराए के टैंकरों से खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। लगातार बढ़ता खर्च किसानों की चिंता बढ़ा रहा है और समय पर बारिश नहीं होने पर खरीफ फसल पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
कीर्तिमान डेस्क
26 Jun 2026, 04:47 PM
आरंग
छत्तीसगढ़ में मानसून की धीमी रफ्तार और कई इलाकों में हो रही खंड वर्षा ने खरीफ सीजन की शुरुआत को मुश्किल बना दिया है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। राजधानी रायपुर के आरंग विकासखंड के ग्राम देवदा में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जहां खेतों में नमी बनाए रखने के लिए किसान अब किराए के टैंकरों से पानी मंगवाने को मजबूर हैं।
ग्राम देवदा के किसान केशव कुर्रे और सिकंदर सोनवानी ने करीब 15 दिन पहले सरना धान की बुआई की थी। इस समय धान की नर्सरी तैयार करने के लिए नियमित पानी की जरूरत होती है, लेकिन बारिश नहीं होने से खेत सूखने लगे हैं। ऐसे में किसानों को उम्मीद थी कि गांव के पारंपरिक तालाब से सिंचाई के लिए पानी मिल जाएगा, जिससे उनकी फसल सुरक्षित रह सके।
पंचायत के फैसले से किसानों की बढ़ी मुश्किलें
किसानों की उम्मीद उस समय टूट गई जब ग्राम पंचायत ने नियमों का हवाला देते हुए तालाब का पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। पंचायत के इस फैसले के बाद पहले से जल संकट झेल रहे किसानों की परेशानी और बढ़ गई। उनका कहना है कि इस कठिन समय में तालाब का पानी मिल जाता तो फसल को काफी राहत मिल सकती थी। पंचायत से राहत नहीं मिलने के बाद किसानों ने किसानो की बढ़ी चिंता मजबूरी में किराए के वॉटर टैंकरों का सहारा लिया। केशव कुर्रे अपनी 5 एकड़ और सिकंदर सोनवानी 10 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं। दोनों किसानों की कुल 15 एकड़ भूमि में अब तक दो बार टैंकरों के जरिए सिंचाई कराई जा चुकी है। हालांकि, लगातार टैंकर मंगवाना बेहद महंगा साबित हो रहा है और इससे खेती की लागत तेजी से बढ़ती जा रही है।
बारिश नहीं हुई तो फसल बचाना होगा मुश्किल
किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो टैंकरों के भरोसे खेती बचा पाना संभव नहीं होगा। लगातार बढ़ते खर्च के कारण आर्थिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में फसल के साथ-साथ किसानों की मेहनत और निवेश दोनों पर संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद न तो कृषि विभाग की ओर से कोई ठोस पहल की जा रही है और न ही स्थानीय प्रशासन किसानों की समस्याओं पर ध्यान दे रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत के उपाय नहीं किए गए, तो देवदा के कई किसानों की खरीफ फसल प्रभावित हो सकती है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।