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इंदौर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
इंदौर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
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हाईकोर्ट का कड़ा रुख : अवैध होर्डिंग्स की शिकायत मिलते ही 24 घंटे में हटाएं, जिम्मेदार लोगों पर दर्ज होगी FIR

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अवैध होर्डिंग, फ्लेक्स और पोस्टरों को लेकर सख्त आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने नगर निगम और प्रशासन को शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर ऐसे विज्ञापन हटाने और इन्हें लगाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 28 Jul 2026, 12:31 PM · अपडेट: 28 Oct 2026, 08:10 PM
इंदौर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
शहरों की सड़कों, चौराहों और फुटपाथों पर बिना अनुमति ताने गए अवैध होर्डिंग्स, फ्लेक्स और पोस्टरों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आदेश जारी करते हुए साफ किया है कि अवैध विज्ञापनों या बैनरों की शिकायत मिलने पर नगर निगम और संबंधित प्रशासन को महज 24 घंटे के भीतर कार्रवाई कर उन्हें हटाना होगा। अदालत ने साफ निर्देश दिए हैं कि केवल बैनर-होर्डिंग हटाना काफी नहीं होगा, बल्कि इन्हें लगाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। 

आदेश का व्यापक असर 

न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों को जबलपुर खंडपीठ द्वारा वर्ष 2022 में दिए गए आदेश और 1 नवंबर 2019 के शासन परिपत्र का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इंदौर खंडपीठ के इस आदेश का व्यापक असर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी देखने को मिल रहा है। कोर्ट के कड़े तेवरों को देखते हुए भोपाल नगर निगम भी हरकत में आ गया है। 

जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू 

भोपाल नगर निगम के होर्डिंग प्रभारी परितोष रंजन परसाई ने स्पष्ट किया कि आदेश के परिपालन में शहर भर में अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत बिना अनुमति लगाए गए सभी तरह के राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनरों को तुरंत हटाया जाएगा। इसके लिए निगम एक विशेष टीम का गठन कर जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू करने जा रहा है।अदालत के सामने यह याचिका एसएस एडवर्टाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड, जबलपुर व अन्य द्वारा दायर की गई थी। 

वैध स्ट्रक्चरों पर अवैध बैनर-पोस्टर

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे नगर निगम को भारी राजस्व और तय शुल्क चुकाकर कानूनी रूप से यूनिपोल, लॉलीपॉप और अन्य आउटडोर विज्ञापन स्ट्रक्चर संचालित करते हैं। इसके बावजूद विभिन्न त्योहारों, राजनीतिक दौरों या आयोजनों के समय असामाजिक तत्व उनके वैध स्ट्रक्चरों पर जबरन अपने अवैध बैनर और पोस्टर चिपका देते हैं। इससे न केवल उनके विज्ञापन छिप जाते हैं और आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि महंगे स्ट्रक्चरों को भी भारी क्षति पहुंचती है।

सावधान! जानिए 'आउटडोर मीडिया रूल्स-2017' के तहत क्या है अवैध?

अगर आप भी प्रचार या शुभकामनाओं के लिए सड़कों पर फ्लेक्स-बैनर लगाते हैं, तो यह जान लेना जरूरी है कि आउटडोर मीडिया रूल्स-2017 के तहत कौन-कौन से स्ट्रक्चर अवैध माने जाते हैं:

  • बिना अनुमति के पोस्टर: बिजली के खंभों, पेड़ों, डिवाइडरों या सार्वजनिक संपत्तियों पर बिना मंजूरी टांगे गए फ्लेक्स, कटआउट और पोस्टर।

  • असुरक्षित स्ट्रक्चर: रजिस्टर्ड चार्टर्ड या स्ट्रक्चरल इंजीनियर के सुरक्षा प्रमाण पत्र (Safety Certificate) के बिना खड़े किए गए बोर्ड।

  • प्रतिबंधित क्षेत्र: ऐतिहासिक इमारतों, राजभवन, हाईकोर्ट और धार्मिक स्थलों के तय दायरे के भीतर लगाए गए विज्ञापन।

  • यातायात में बाधा व खतरा: ट्रैफिक लाइट, चौराहे या संकरे मोड़ के पास लगाई गई अत्यधिक तेज रोशनी या झिलमिलाती डिजिटल स्क्रीनें।

  • संकेतक छिपाना: रोड साइनबोर्ड, ट्रैफिक सिग्नल या दिशा-सूचक बोर्डों को ढकने वाले बोर्ड।

  • पैदल यात्रियों का रास्ता रोकना: फुटपाथ, सर्विस रोड या डिवाइडर पर इस तरह लगाए गए यूनिपोल जिनसे आम लोगों के चलने का रास्ता बाधित हो।

  • मानकों का उल्लंघन: तय आकार से अधिक बड़े फ्रेम या ऐसे स्ट्रक्चर जो हवा के दबाव और वजन सुरक्षा मानकों पर खरे न उतरते हों।

  • बिना वैधानिक मंजूरी: ऐसी कोई भी संरचना जिसे बिना प्रशासनिक अनुमति और तय प्रक्रिया का पालन किए लगाया गया हो।

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