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बेमेतरा जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़
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बेमेतरा

स्वास्थ्य संकट : डॉक्टरों की भारी कमी से बेमेतरा जिला अस्पताल बेहाल, मरीजों को लंबा इंतजार

बेमेतरा जिला अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट में हैं। करीब 50 स्वीकृत डॉक्टर पदों में सिर्फ 5 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि 99 नर्सिंग पदों में से 44 नर्सें ही सेवाएं दे रही हैं। प्रतिदिन 600 से 800 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
19 Jun 2026, 05:40 PM
बेमेतरा

बेमेतरा जिला अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट में पहुंच गई है। जिले भर से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों का सहारा लेना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में डॉक्टरों के करीब 50 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 5 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। इतनी कम संख्या में मेडिकल स्टाफ होने के कारण पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी उन्हीं पर आ गई है, जिससे इलाज की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।

नर्सिंग स्टाफ की कमी से भी बढ़ी परेशानी

अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक है। 99 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 44 नर्सें ही कार्यरत हैं। स्टाफ की कमी के चलते मरीजों की देखभाल, वार्ड प्रबंधन और आपात सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 600 से 800 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार भीड़ अधिक होने पर मरीज बिना उपचार के ही लौटने को मजबूर हो जाते हैं। अस्पताल में लंबे समय से हड्डी रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इससे फ्रैक्चर और हड्डी संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।

ग्रामीण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेने की मजबूरी

दूर-दराज ग्रामीण इलाकों से बड़ी उम्मीद के साथ जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को अक्सर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिलते। ऐसे में उन्हें मजबूरन निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ता है या फिर दुर्ग और रायपुर जैसे शहरों में जाना पड़ता है।

अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। इसके बावजूद अब तक इस पर कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

मरीजों और परिजनों की प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग

मरीजों और उनके परिजनों ने शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होगी, तब तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना मुश्किल है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल 5 डॉक्टरों के भरोसे चल रही है, तो आम मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज कैसे मिल पाएगा। फिलहाल जिला अस्पताल संसाधनों की कमी से जूझ रहा है और मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद में निराश होकर लौट रहे हैं।
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