स्वास्थ्य व्यवस्था : एंबुलेंस नहीं मिली, महिला की मौत के बाद अस्पताल में बवाल
पन्ना जिले में जहरीला पदार्थ खाने वाली 40 वर्षीय महिला की समय पर एंबुलेंस न मिलने से रास्ते में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस ढाई घंटे की देरी से पहुंची और रेफर किए जाने के बाद भी दूसरी एंबुलेंस नहीं मिली। वहीं, पोस्टमार्टम के लिए तीन घंटे तक इंतजार कराने से नाराज परिजनों ने जिला अस्पताल में हंगामा किया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। जहरीला पदार्थ खाने वाली एक महिला को समय पर एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलने के कारण उसकी जान चली गई। इतना ही नहीं, मौत के बाद पोस्टमार्टम कराने के लिए भी परिजनों को घंटों तक अस्पताल में भटकना पड़ा, जिससे नाराज होकर उन्होंने जिला अस्पताल में हंगामा कर दिया।
जानकारी के अनुसार, अजयगढ़ क्षेत्र के पड़रहा गांव निवासी 40 वर्षीय विद्या कुशवाहा ने मंगलवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन आरोप है कि एंबुलेंस करीब ढाई घंटे बाद रात 2 बजे मौके पर पहुंची।
रेफर होने के बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस
परिजनों के मुताबिक, विद्या को पहले अजयगढ़ अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल पन्ना रेफर कर दिया। हालांकि यहां भी उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद परिवार ने निजी वाहन की व्यवस्था की और पन्ना के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। परिजनों का आरोप है कि सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक वे डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों से पोस्टमार्टम कराने की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान परिवार के सदस्य अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे।
हंगामे के बाद हरकत में आया अस्पताल प्रशासन
जब लंबे इंतजार के बावजूद कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा, तो परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। नाराज लोगों ने जिला अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन और हंगामा किया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और तत्काल डॉक्टर को बुलाकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
परिवार ने बताया कि इसी वर्ष मार्च महीने में विद्या के 17 वर्षीय बेटे देवराज की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। बेटे के निधन के बाद से वह गहरे सदमे और मानसिक तनाव में रह रही थी। परिजनों का कहना है कि इस घटना का असर उनकी मानसिक स्थिति पर लगातार पड़ रहा था।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
घटना के बाद परिजनों ने एंबुलेंस सेवा और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि समय पर एंबुलेंस और उपचार की सुविधा मिल जाती तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी। वहीं पोस्टमार्टम में हुई देरी ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की बात कही जा रही है।