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5 बार के ओलंपियन राजा रणधीर सिंह का निधन
5 बार के ओलंपियन राजा रणधीर सिंह का निधन
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 भारतीय शूटिंग  के नायक : एशियाई खेलों के स्वर्ण विजेता राजा रणधीर सिंह का निधन

5 बार के ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और दिग्गज खेल प्रशासक राजा रणधीर सिंह का नई दिल्ली में निधन हो गया। उन्होंने 1978 एशियाई खेलों में भारत को शूटिंग में पहला स्वर्ण दिलाया था और बाद में ओलंपिक व एशियाई खेल प्रशासन में भी अहम भूमिका निभाई।

कीर्तिमान नेटवर्क
28 May 2026, 07:44 AM
📍 नई दिल्ली
भारतीय खेल जगत के लिए 27 मई का दिन बेहद दुखद साबित हुआ, जब देश के दिग्गज निशानेबाज, पांच बार के ओलंपियन और अनुभवी खेल प्रशासक राजा रणधीर सिंहने दुनिया को अलविदा कह दिया। 80 वर्षीय राजा रणधीर सिंह लंबे समय तक भारतीय शूटिंग और ओलंपिक आंदोलन की मजबूत आवाज बने रहे। उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया, बल्कि खेल प्रशासन में भी अहम भूमिका निभाते हुए भारतीय खिलाड़ियों को नई पहचान दिलाने का काम किया। एशियाई खेलों में भारत को शूटिंग का पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले रणधीर सिंह का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

भारतीय शूटिंग के स्वर्णिम अध्याय के नायक

राजा रणधीर सिंह भारतीय शूटिंग इतिहास के सबसे सम्मानित नामों में गिने जाते थे। उन्होंने लंबे समय तक भारतीय ट्रैप शूटिंग टीम का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को नई पहचान दिलाई। वह पांच बार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे। अपने शानदार प्रदर्शन और खेल के प्रति समर्पण के कारण उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उनकी पहचान केवल एक बेहतरीन निशानेबाज के रूप में ही नहीं थी, बल्कि वह भारतीय खेल प्रशासन के सबसे प्रभावशाली चेहरों में भी शामिल रहे। उन्होंने भारतीय शूटिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

1978 एशियाई खेलों में रचा इतिहास

1978 एशियाई खेलों में राजा रणधीर सिंह ने इतिहास रचते हुए ट्रैप शूटिंग इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने थे। उस दौर में भारत में शूटिंग खेल को बहुत ज्यादा पहचान नहीं मिली थी, लेकिन रणधीर सिंह की सफलता ने इस खेल को नई दिशा देने का काम किया। उनकी इस उपलब्धि ने देश में शूटिंग खेल को लोकप्रिय बनाने की मजबूत नींव रखी।  उनके प्रदर्शन ने आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को प्रेरित किया और भारत में शूटिंग को एक पेशेवर खेल के रूप में स्थापित करने में मदद की।

खिलाड़ी से बने प्रभावशाली खेल प्रशासक

अपने खेल करियर के दौरान ही उन्होंने खेल प्रशासन में भी सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। 1994 एशियाई खेलों में वह ऐसे पहले व्यक्ति बने जिन्होंने एक साथ खिलाड़ी और खेल संगठन के पदाधिकारी दोनों की भूमिका निभाई।इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। उनकी प्रशासनिक क्षमता और खेलों की गहरी समझ के कारण उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सम्मान मिला। राजा रणधीर सिंह हमेशा भारतीय खिलाड़ियों के हितों की मजबूती से वकालत करते रहे। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय अवसर बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया।

ओलंपिक और एशियाई खेलों में बड़ी भूमिका

राजा रणधीर सिंह ने एशियाई ओलंपिक परिषद, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति,भारतीय ओलंपिक संघ और विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी  में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।वह 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में उपाध्यक्ष भी रहे। वर्ष 2024 में उन्होंने इतिहास रचते हुए ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के अध्यक्ष बनने वाले पहले भारतीय होने का गौरव हासिल किया था। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं थी, बल्कि भारतीय खेल प्रशासन के लिए भी ऐतिहासिक मानी गई। इससे अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं में भारत की भूमिका और प्रभाव दोनों मजबूत हुए।

राजीव भाटिया ने जताया शोक

नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सचिव राजीव भाटिया  ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।उन्होंने कहा,“गहरे दुख के साथ हम राजा रणधीर सिंह के निधन की खबर साझा कर रहे हैं। वह एक प्रतिष्ठित ओलंपियन, अर्जुन अवॉर्डी और भारत, एशिया तथा अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक जगत के सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक थे। शूटिंग खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में उनका योगदान अमूल्य रहा है।” भारतीय खेल जगत के कई खिलाड़ियों, कोचों और खेल अधिकारियों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी।

पटियाला के शाही परिवार 

राजा रणधीर सिंह का जन्म पटियाला के शाही परिवार में हुआ था। खेलों के प्रति उनका जुनून बचपन से ही था। उन्होंने न केवल खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की, बल्कि भारत में शूटिंग खेल के विकास में भी बड़ी भूमिका निभाई। उनकी बेटी राजेश्वरी कुमारी भी एशियाई खेलों की पदक विजेता निशानेबाज हैं। परिवार में उनकी पत्नी विनीता सिंह और तीन बेटियां महिमा, सुनैना और राजेश्वरी हैं। परिवार और खेल जगत दोनों के लिए उनका जाना एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति

 राजा रणधीर सिंह केवल खिलाड़ी नहीं बल्कि भारतीय खेल प्रशासन की मजबूत आवाज थे। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतर अवसर दिलाने के लिए लगातार काम किया।उनके निधन को भारतीय शूटिंग और ओलंपिक आंदोलन के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। आने वाले वर्षों तक भारतीय खेल जगत उनके योगदान को याद रखेगा। उनकी उपलब्धियां और खेलों के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों और खेल प्रशासकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

खेल करियर

राजा रणधीर सिंह का खेल करियर भारतीय शूटिंग इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में गिना जाता है। वह भारत के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने पांच बार ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने मुख्य रूप से ट्रैप शूटिंग इवेंट में हिस्सा लिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को नई पहचान दिलाई। वर्ष 1978 के 1978 एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। वह एशियाई खेलों में शूटिंग का गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने थे। अपने शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। खेल करियर के दौरान ही उन्होंने खेल प्रशासन में भी सक्रिय भूमिका निभाई और बाद में भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संगठनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। शूटिंग खेल को भारत में लोकप्रिय बनाने और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर दिलाने में उनका योगदान बेहद अहम माना जाता है।
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