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भरोसे की कीमत पड़ी भारी : ₹3.20 लाख लेकर दिया बाउंस चेक, कोर्ट ने सुनाई 1 साल की जेल

महासमुंद कोर्ट ने ₹3.20 लाख के चेक बाउंस मामले में आरोपी को 1 साल की जेल और ₹3.80 लाख प्रतिकर देने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में नरमी से समाज का भरोसा कमजोर होता है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
27 Jun 2026, 08:19 PM
महासमुंद
आपसी भरोसे और पुरानी दोस्ती का फायदा उठाकर लाखों रुपए की चपत लगाने वाले एक आरोपी को महासमुंद की अदालत ने तगड़ा सबक सिखाया है। लेनदेन के मामले में दिए गए चेक के बाउंस होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अरुण नोरगे की कोर्ट ने आरोपी सुबेश भोई को 1 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, कोर्ट ने पीड़ित (परिवादी) को न्याय दिलाते हुए आरोपी पर ₹3.80 लाख का हर्जाना (प्रतिकर) भी ठोंका है। यदि आरोपी ने मुआवजे की यह रकम तय समय पर अदा नहीं की, तो उसे 2 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

पिता की मधुर दोस्ती का फायदा उठाकर जाल में फंसाया

यह पूरा मामला ग्राम पाली (थाना खल्लारी) निवासी जगदीश पटेल और बडगांव (थाना बसना) निवासी आरोपी सुबेश भोई के बीच का है। जगदीश पटेल के आरोपी सुबेश के पिता के साथ बेहद पुराने और मधुर संबंध थे। पिता की इसी साख और आपसी भरोसे की आड़ लेकर सुबेश ने अपने घरेलू काम की मजबूरी बताते हुए जगदीश से ₹3,20,000 नगद उधार ले लिए। आरोपी ने वादा किया था कि वह चार महीने के भीतर पाई-पाई लौटा देगा।

खाता खाली था, फिर भी काट दिया ₹3.20 लाख का चेक

चार महीने बीत जाने के बाद जब जगदीश ने अपनी रकम मांगी, तो सुबेश ने टालमटोल करने के बजाय चालाकी दिखाई। उसने जगदीश को एचडीएफसी बैंक, शाखा महासमुन्द का एक चेक (दिनांक 15 अक्टूबर 2023) सौंप दिया। जगदीश ने जब इस चेक को अपने आईसीआईसीआई बैंक खाते में क्लीयरेंस के लिए लगाया, तो तीन दिन बाद ही 18 अक्टूबर 2023 को बैंक ने 'खाते में पर्याप्त राशि नहीं है' की आधिकारिक टीप लगाकर चेक बाउंस कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने वकील के जरिए लीगल नोटिस भेजा, जिसका आरोपी ने कोई जवाब नहीं दिया। थक-हारकर पीड़ित ने दिसंबर 2023 में कोर्ट की शरण ली।

कोर्ट में आरोपी का 'कोरा पैंतरा' फेल; वकील ने रखे पुख्ता सबूत

सुनवाई के दौरान आरोपी सुबेश भोई ने खुद को पाक-साफ बताने के लिए कोर्ट में एक अजीब दलील दी। उसने दावा किया कि परिवादी जगदीश ने उसके पिता से सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर एक कोरा चेक लिया था, जिसमें बाद में मनमानी रकम भरकर झूठा केस दर्ज करा दिया। हालांकि, आरोपी के वकील गजेंद्र निराला इस दावे के पक्ष में कोर्ट में कोई भी गवाह या दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर सके। दूसरी तरफ, परिवादी के वकील जेएस चावला ने मूल चेक, बैंक का मेमो और डाक रसीद जैसे अचूक सबूत कोर्ट के सामने रख दिए, जिससे आरोपी का पैंतरा पूरी तरह फेल हो गया।

कोर्ट ने कहा- चेक अनादरण के मामले बढ़ रहे, ढील देना ठीक नहीं

न्यायाधीश अरुण नोरगे ने आरोपी की दलीलों को खारिज करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा— "अगर चेक का गलत इस्तेमाल हुआ था, तो आरोपी 3 साल तक चुप क्यों था? उसने थाने में शिकायत क्यों नहीं की? 
अदालत ने कहा कि वर्तमान में चेक बाउंस के मामले समाज में तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे व्यापारिक और आपसी भरोसा खत्म हो रहा है। ऐसे में आरोपी को 'अपराधी परिवीक्षा अधिनियम' का लाभ या किसी भी तरह की ढील देना न्यायसंगत नहीं होगा। कोर्ट ने आरोपी को फैसले की कॉपी मुफ्त में सौंपने के निर्देश दिए हैं, जबकि उसकी जमानत का मुचलका आगामी 6 महीने तक प्रभावी रहेगा। अपील की अवधि बीतने के बाद हर्जाने की राशि पीड़ित जगदीश पटेल को सौंप दी जाएगी।

केस का पूरा घटनाक्रम: एक नजर में

उधार ली गई रकम: ₹3,20,000 नगद (पारिवारिक काम के नाम पर)
चेक बाउंस होने की तारीख: 18 अक्टूबर 2023 (अपर्याप्त राशि के कारण)
कोर्ट का फैसला (27 जून 2026): 1 साल की जेल और ₹3,80,000 का हर्जाना
जुर्माना न देने पर पेनल्टी: 2 महीने की अतिरिक्त साधारण जेल
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