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एलएनजी (LNG) गैस से भरा टैंकर जहाज
एलएनजी (LNG) गैस से भरा टैंकर जहाज
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होर्मुज संकट गहराया : अमेरिका-ईरान तनाव का असर LNG सप्लाई घटी, भारत ने बदला आयात का रास्ता  

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले LNG निर्यात में भारी गिरावट आई है। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के बाद भारत ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए UAE और ओमान के वैकल्पिक मार्गों से तेल और LNG आयात शुरू किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि संकट लंबा खिंचने पर लागत बढ़ सकती है, लेकिन हालात सामान्य होने पर बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
18 Jul 2026, 04:52 PM
नई दिल्ली
 अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से होने वाले तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के निर्यात में तेज गिरावट दर्ज की गई है। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी (S&P Global Energy) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हालिया तनाव ने 17 जून को हुए उस समझौते के प्रभाव को लगभग खत्म कर दिया है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। 
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए रणनीति में बदलाव किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान के वैकल्पिक मार्गों से कच्चे तेल और एलएनजी का आयात बढ़ा रहा है, ताकि किसी संभावित व्यवधान का असर घरेलू ऊर्जा जरूरतों पर कम से कम पड़े।
ईरान की चेतावनी से बढ़ी वैश्विक चिंता
तनाव के बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल निर्यात को बाधित किया गया तो वह फुजैराह पाइपलाइन और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन जैसे वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों को भी निशाना बना सकता है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि ऐसे कदम से कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। 
LNG जहाजों की आवाजाही में कमी
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंतिम दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना औसतन 0.8 एलएनजी जहाज गुजर रहे थे। लेकिन 15 जुलाई तक यह संख्या घटकर सिर्फ 0.2 जहाज प्रतिदिन रह गई। पिछले एक सप्ताह में फारस की खाड़ी से केवल एक एलएनजी जहाज ही बाहर निकल सका है। 
लेकिन खाड़ी में फंसा भारी स्टॉक
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के सीनियर प्रिंसिपल एनालिस्ट मेहरून एतेबारी के अनुसार, मौजूदा समस्या एलएनजी उत्पादन में कमी की नहीं है, बल्कि जहाजों की आवाजाही पर लगे जोखिम और प्रतिबंधों की है। कतरएनर्जी और यूएई की ADNOC जैसी कंपनियां सामान्य रूप से उत्पादन और लोडिंग का काम कर रही हैं, लेकिन आगे का रास्ता बाधित होने के कारण बड़ी मात्रा में एलएनजी जहाजों में ही खाड़ी के भीतर फंसी हुई है। 
19 लाख मीट्रिक टन LNG खाड़ी में अटकी
अनुमान है कि जुलाई के मध्य तक केवल कतर के सात जहाजों में लगभग 5.7 लाख मीट्रिक टन एलएनजी लदी हुई थी। वहीं, पूरी फारस की खाड़ी में करीब 19 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले एलएनजी टैंकर खड़े हैं। यह मात्रा युद्ध शुरू होने से पहले लगभग आठ दिनों के कुल निर्यात के बराबर मानी जा रही है।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर 
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो वैकल्पिक मार्गों से आयात करने के कारण परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही समुद्री मार्ग सामान्य होंगे, खाड़ी में फंसा भारी एलएनजी स्टॉक तेजी से वैश्विक बाजार में पहुंचेगा। इससे आपूर्ति सुधरेगी और भारत समेत कई देशों को राहत मिलने की संभावना है।
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