मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक बार फिर छात्राओं की सेहत से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। साउथ तुकोगंज क्षेत्र स्थित मधुर गर्ल्स हॉस्टल में दूषित और खराब भोजन परोसे जाने की शिकायत के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हॉस्टल को खाना उपलब्ध कराने वाली मेस को सील कर दिया है। बताया जा रहा है कि खराब भोजन खाने से 20 से अधिक छात्राएं बीमार पड़ गईं, जबकि कई छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल तक पहुंचना पड़ा। यह मामला तब सामने आया जब छात्राओं ने लगातार शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होने पर सीएम हेल्पलाइन और जिला प्रशासन से शिकायत की। इसके बाद खाद्य विभाग और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और कई गंभीर अनियमितताएं पाईं।
कई दिनों से गंदा खाना
हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का कहना है कि उन्हें लंबे समय से खराब गुणवत्ता का भोजन दिया जा रहा था। खाने से दुर्गंध आती थी और कई बार भोजन में कीड़े, कॉकरोच, बाल, कंकड़ और अन्य आपत्तिजनक चीजें भी मिलीं। छात्राओं के अनुसार उन्होंने कई बार मेस संचालक और हॉस्टल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। नतीजा यह हुआ कि समस्या बढ़ती गई और आखिरकार कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई।
15 दिनों से बिगड़ रही तबीयत
जानकारी के मुताबिक पिछले करीब दो सप्ताह से हॉस्टल में रहने वाली कई छात्राएं पेट दर्द, उल्टी, दस्त और संक्रमण जैसी समस्याओं से जूझ रही थीं। शुरुआत में इसे सामान्य मौसमी बीमारी समझा गया, लेकिन जब लगातार छात्राएं बीमार पड़ने लगीं तो जांच कराई गई। जांच के दौरान दूषित भोजन की आशंका सामने आई। कुछ छात्राओं की हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कर इलाज कराना पड़ा।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
शनिवार को जब भोजन में कीड़े और बाल मिलने की घटना सामने आई तो छात्राओं ने उसके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिए। वीडियो वायरल होते ही मामला तेजी से चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने भी सवाल उठाए कि आखिर छात्रावासों और हॉस्टलों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच क्यों नहीं की जाती। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
जांच में खुली गंदगी की परतें
जांच के दौरान पता चला कि हॉस्टल में भोजन की आपूर्ति तनुश्री थाली नामक मेस द्वारा की जा रही थी। खाद्य विभाग की टीम ने निरीक्षण में पाया कि किचन और भोजन बनाने वाली जगह पर साफ-सफाई के बुनियादी नियमों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। गंदगी के बीच भोजन तैयार किया जा रहा था और खाद्य सामग्री अस्वच्छ बर्तनों में रखी गई थी। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि किचन के बेहद करीब शौचालय बना हुआ था। ड्रेनेज व्यवस्था खराब थी और किचन की कई टाइल्स टूटी हुई थीं। अधिकारियों ने मौके से आटा और घी के नमूने लेकर उन्हें भोपाल स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
केवल कार्रवाई कर देना काफी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि हॉस्टलों और मेस की नियमित निगरानी हो, खाद्य सामग्री की समय-समय पर जांच हो और लापरवाही मिलने पर कड़ी जवाबदेही तय की जाए। देशभर से बाहर पढ़ने आने वाले हजारों छात्र-छात्राएं हॉस्टल और मेस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उनकी सुविधा नहीं बल्कि उनका अधिकार है। इंदौर की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक छात्राओं की थाली में पोषण की जगह लापरवाही परोसी जाती रहेगी?
