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Uber की ड्राइवरलेस टैक्सी
Uber की ड्राइवरलेस टैक्सी
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बिना ड्राइवर वाली टैक्सी कैसे करती है काम? जानिए पूरी टेक्नोलॉजी

Uber ड्राइवरलेस मोबिलिटी के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रही है। कंपनी आने वाले वर्षों में Robotaxi नेटवर्क बनाने के लिए 10 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करेगी। इन बिना ड्राइवर वाली टैक्सियों में LiDAR, Radar, कैमरे, GPS और AI सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जो सड़क, ट्रैफिक और बाधाओं को पहचानकर खुद फैसले लेते हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
06 Aug 2026, 06:21 PM
गैजेट डेस्क
दुनिया की दिग्गज राइड-हेलिंग कंपनी Uber ने ऑटोनॉमस यानी बिना ड्राइवर वाली टैक्सी सेवा की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी आने वाले वर्षों में इस तकनीक पर 10 अरब डॉलर (करीब 95 हजार करोड़ रुपए ) से अधिक निवेश करने की योजना बना रही है। Uber का लक्ष्य दुनिया के अलग-अलग शहरों में करीब 1.2 लाख ड्राइवरलेस गाड़ियों का नेटवर्क तैयार करना है।
कंपनी की योजना 2026 तक कम से कम 15 शहरों में Robotaxi सर्विस शुरू करने की है। इस घोषणा के बाद लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है कि आखिर बिना इंसान के चलने वाली ये टैक्सियां सड़क पर कैसे काम करेंगी और कैसे सुरक्षित तरीके से यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाएंगी।

Robotaxi में ड्राइवर की जगह लेते हैं सेंसर और AI 

Robotaxi देखने में सामान्य कारों जैसी ही होती हैं, लेकिन इनमें ड्राइविंग का पूरा सिस्टम इंसान की जगह अत्याधुनिक तकनीक संभालती है। इन गाड़ियों में LiDAR, Radar, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, GPS और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंप्यूटर सिस्टम लगाए जाते हैं। ये सेंसर लगातार वाहन के आसपास के माहौल को स्कैन करते रहते हैं। सड़क की स्थिति, ट्रैफिक सिग्नल, पैदल चलने वाले लोग, दूसरी गाड़ियां और रास्ते में आने वाली बाधाओं की जानकारी सिस्टम को लगातार मिलती रहती है।

कुछ मिलीसेकंड में फैसले लेता है AI सिस्टम 

Robotaxi में लगे सेंसर से मिलने वाले डेटा को AI कंप्यूटर तुरंत प्रोसेस करता है। इसके बाद सिस्टम खुद तय करता है कि गाड़ी को कब ब्रेक लगाना है, कितनी स्पीड रखनी है, किस दिशा में मुड़ना है या किसी बाधा से कैसे बचना है। यानी वाहन चलाने से जुड़े ज्यादातर फैसले सॉफ्टवेयर और सेंसर सिस्टम के जरिए अपने आप लिए जाते हैं। इसमें मशीन लर्निंग तकनीक का भी इस्तेमाल होता है, जिससे वाहन अलग-अलग परिस्थितियों को समझने और बेहतर प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनता है। फिलहाल ड्राइवरलेस गाड़ियों को किसी भी सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं होती। इन्हें आमतौर पर Geofenced Areas में चलाया जाता है। ये ऐसे निर्धारित इलाके होते हैं, जहां पहले से हाई-डेफिनिशन डिजिटल मैप तैयार किए जाते हैं। इन मैप्स की मदद से AI सिस्टम को सड़क की बनावट, लेन, मोड़ और ट्रैफिक पैटर्न की जानकारी पहले से होती है। यही कारण है कि शुरुआती दौर में Robotaxi सेवाएं कुछ चुनिंदा शहरों और सीमित रास्तों तक ही सीमित रहेंगी।

Uber खुद नहीं बना रही पूरी तकनीक 

रिपोर्ट्स के अनुसार, Uber इस पूरी तकनीक को अकेले विकसित नहीं कर रही है। कंपनी ऑटोनॉमस व्हीकल टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कई कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही है। इनमें Waymo, Zoox, Lucid, Rivian जैसी कंपनियां शामिल हैं। Uber का उद्देश्य इन कंपनियों की तकनीक को अपने राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म के साथ जोड़कर बड़े स्तर पर Robotaxi नेटवर्क तैयार करना है। 

क्या इंसानी ड्राइवरों की नौकरी खत्म हो जाएगी?

Uber ने फिलहाल मानव ड्राइवरों को हटाने की कोई घोषणा नहीं की है। शुरुआती चरण में Robotaxi सीमित इलाकों और तय रूट्स पर ही चलेंगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई जगहों पर शुरुआती समय में निगरानी व्यवस्था भी रखी जा सकती है। हालांकि, आने वाले समय में अगर ड्राइवरलेस तकनीक ज्यादा सुरक्षित और किफायती साबित होती है, तो एयरपोर्ट, सिटी सेंटर और तय शहरी मार्गों पर इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है। वहीं, इस तकनीक के विस्तार से नए क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं। Robotaxi फ्लीट की निगरानी, वाहन मेंटेनेंस, चार्जिंग, सफाई और ऑपरेशन से जुड़े कामों की मांग बढ़ सकती है। Robotaxi सिर्फ बिना ड्राइवर वाली कार नहीं है, बल्कि यह परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है। आने वाले वर्षों में AI और ऑटोनॉमस तकनीक शहरों में यात्रा के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। हालांकि, इसके लिए सुरक्षा, कानून और लोगों के भरोसे जैसी चुनौतियों को दूर करना सबसे बड़ी जरूरत होगी।
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