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India First Defence Company
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India First Defence Company : भारत की पहली डिफेंस कंपनी की कहानी, जानें आज कौन है इसका मालिक

भारत आज रक्षा के क्षेत्र में दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। वर्तमान में देश में 16 सरकारी रक्षा उपक्रम और 400 से अधिक निजी कंपनियाँ सक्रिय हैं, जिनके पास हथियार और सैन्य साजो-सामान बनाने के कानूनी अधिकार हैं।

विशेष संवाददाता
12 Jul 2026, 01:03 PM
नई दिल्ली

आज भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में 16 रक्षा सार्वजनिक उपक्रम और 400 से अधिक लाइसेंस प्राप्त निजी कंपनियां काम कर रही हैं। इनके साथ हजारों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग भी जुड़े हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत की पहली रक्षा कंपनी कौन थी और इसकी शुरुआत कैसे हुई। आज जिस कंपनी को देश की रक्षा ताकत की रीढ़ माना जाता है, उसकी नींव 85 साल पहले रखी गई थी। इस सफर में उद्योगपति, एक महाराजा और एक दूरदर्शी प्रशासक की अहम भूमिका रही।

भारत की पहली रक्षा कंपनी कौन है

भारत की पहली रक्षा विमान निर्माण कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड मानी जाती है। यह देश की प्रमुख सरकारी महारत्न कंपनी है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। आज यह कंपनी लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, इंजन, मानवरहित विमान, विमान उपकरण और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई उत्पाद तैयार करती है। भारत की पहली रक्षा कंपनी आज भारतीय वायुसेना, नौसेना और थलसेना की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में योगदान दे रही है।

एक मुलाकात से शुरू हुई बड़ी कहानी

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स की शुरुआत वर्ष 1940 में हुई थी। इससे पहले 1939 में उद्योगपति सेठ वालचंद हीराचंद की मुलाकात अमेरिकी विमान विशेषज्ञ विलियम डगलस पॉली से हुई थी। यह मुलाकात एक लंबी हवाई यात्रा के दौरान हुई। इसके बाद भारत में विमान निर्माण कंपनी स्थापित करने का विचार मजबूत हुआ। नतीजतन 23 दिसंबर 1940 को बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड की स्थापना हुई।

मैसूर के महाराजा ने दिया बड़ा सहयोग

उस समय मैसूर के महाराजा जयाचामाराजेंद्र वाडियार ने इस परियोजना का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कंपनी के लिए 700 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई। इसके अलावा 25 लाख रुपये का निवेश भी किया। यही वजह है कि उस दौर में भारत विमान निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सका। मैसूर के तत्कालीन दीवान सर मिर्जा इस्माइल ने भी इस परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उनके समर्थन से कंपनी की स्थापना और शुरुआती कामकाज को गति मिली।

कब सरकार के नियंत्रण में आई कंपनी

मार्च 1941 में भारत सरकार कंपनी की हिस्सेदार बनी। इसके बाद 1942 में कंपनी का प्रबंधन सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। फिर जनवरी 1951 में इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन लाया गया। इसके बाद कंपनी का विस्तार लगातार बढ़ता गया। शुरुआती दौर में कंपनी ने विदेशी सहयोग से कई विमान तैयार किए। इनमें हार्लो ट्रेनर, कर्टिस हॉक फाइटर और वल्टी बॉम्बर जैसे विमान शामिल थे। इन परियोजनाओं ने भारत में विमान निर्माण उद्योग की मजबूत नींव रखी।

आज क्या बनाती है कंपनी

आज कंपनी लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, विमान इंजन और अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े कई उपकरण तैयार करती है। इसके अलावा यह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण संरचनाएं बनाती है। रक्षा मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की कई परियोजनाओं में भी कंपनी की भागीदारी है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में इस कंपनी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश में विकसित कई प्रमुख रक्षा परियोजनाओं में इसका योगदान रहा है। इसी वजह से यह भारत के रक्षा उद्योग की सबसे अहम कंपनियों में गिनी जाती है।

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