गरमाई सियासत : बिलावल भुट्टो की युद्ध वाली गीदड़भभकी, भारत अपने रुख पर अड़िग
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। बिलावल भुट्टो ने भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया, जबकि भारत ने दोहराया कि आतंकवाद पर कार्रवाई होने तक संधि को लेकर उसका रुख नहीं बदलेगा।
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी 'सिंधु जल संधि' (IWT) को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक और सियासी पारा चढ़ गया है। पाकिस्तान की सत्ताधारी गठबंधन सरकार को कंधा दे रही पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है।
बिलावल ने खुलेआम धमकी भरे लहजे में कहा है कि पाकिस्तान इस जल संधि को बचाने के लिए हर मोर्चे पर लड़ाई लड़ने को तैयार है। पाकिस्तानी नेताओं की यह छटपटाहट दरअसल भारत के उस कड़े और स्पष्ट स्टैंड के बाद सामने आई है, जिसमें नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद को पालने वाले देश के साथ इस संधि को फिलहाल बहाल करने का कोई इरादा नहीं है।
पानी को ले कर लगाया आरोप
एक जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व कूटनीतिज्ञ और पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो ने आरोप लगाया कि भारत सिंधु नदी के पानी को एक 'हथियार' की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जिसे पाकिस्तान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
अपनी तीखी बयानबाजी को आगे बढ़ाते हुए बिलावल ने कहा:
"पाकिस्तान युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। हम सिंधु नदी पर अपने अधिकारों को लेकर रत्ती भर भी समझौता नहीं करेंगे। पानी रोकने की हर कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।"
यह पहली बार नहीं है जब बेनजीर भुट्टो और आसिफ अली जरदारी के बेटे बिलावल ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया हो। इससे पहले भी वे पानी के मुद्दे पर 'खून बहाने' जैसी गैर-जिम्मेदाराना बातें कह चुके हैं।
भारत का सीधा संदेश: जब तक आतंकवाद, तब तक नो टॉक
बिलावल की इस ताजा बौखलाहट की सीधी वजह भारतीय विदेश मंत्रालय का वह बयान है, जिसने पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि सीमा पार से लगातार हो रहे आतंकवाद के विरोध में ही भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित किया है।
तनाव की वजह: बीते साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1960 की इस संधि को निलंबित कर दिया था।
भारत का रुख: नई दिल्ली ने दोटूक कहा है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से पनपने वाले आतंकवाद को पनाह देना बंद नहीं करता, तब तक यह निलंबन जारी रहेगा।
विक्टिम कार्ड खेलने के फिरका में
सिंधु जल संधि को लेकर सिर्फ बिलावल ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान का पूरा शीर्ष नेतृत्व—चाहे वो प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हों या सेना प्रमुख असीम मुनीर—लगातार बयानबाजी कर रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी दलील दी थी कि कोई भी एक पक्ष इस अंतरराष्ट्रीय संधि को अकेले खत्म या स्थगित नहीं कर सकता। पाकिस्तान अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाकर 'विक्टिम कार्ड' खेलने की फिराक में है, लेकिन भारत के सख्त रवैये ने साफ कर दिया है कि आतंक और बातचीत (या समझौते) एक साथ नहीं चल सकते।