भारत का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम 'NavIC' एक बार फिर पूरी क्षमता के साथ काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जल्द ही अपना नया नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 लॉन्च करने जा रहा है। इसके बाद कतार में NVS-04 और NVS-05 सैटेलाइट भी हैं। संसद के चालू सत्र के दौरान लोकसभा में एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय अंतरिक्ष मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस बात की आधिकारिक जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि NVS सीरीज के इन तीन उपग्रहों के अलावा एक और सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने का प्लान है।
समय-सीमा का खुलासा नहीं
इसका मकसद NaVIC के बेस लेयर कॉन्स्टेलेशन (7-सैटेलाइट नेटवर्क) को पूरी तरह पूरा करना है। हालांकि, सरकार ने अभी इन सैटेलाइट्स की सटीक लॉन्चिंग डेट या समय-सीमा का खुलासा नहीं किया है। अंतरिक्ष मंत्री ने बताया कि साल 2025 में रिप्लेसमेंट सैटेलाइट NVS-02 का मिशन असफल हो गया था। उस नाकामी से मिली तकनीकी सीखों के आधार पर इंजीनियरों ने NVS-03 के डिजाइन और सिस्टम में जरूरी सुधार किए हैं। अब यह सैटेलाइट श्रीहरिकोटा से उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
नेविगेशन डेटा देने 4 सैटेलाइट्स की होती है जरूरत
वर्तमान में केवल IRNSS 1-B, IRNSS 1-L और NVS-01 ही अंतरिक्ष में एक्टिव हैं और सेवाएं देने में सक्षम हैं। लेकिन NaVIC सिस्टम को बिना किसी रुकावट के सटीक लोकेशन और नेविगेशन डेटा देने के लिए कम से कम 4 ऐसे सैटेलाइट्स की जरूरत होती है, जिनकी एटॉमिक क्लॉक सही तरीके से काम कर रही हों। सैटेलाइट्स की कमी की वजह से NavIC इस समय अकेले पूरी तरह काम नहीं कर पा रहा है।NaVIC के लिए सेकेंड जनरेशन सैटेलाइट्स
नेविगेशन सेवाओं में आई इस मंदी की मुख्य वजह एटॉमिक क्लॉक्स (परमाणु घड़ियों) का खराब होना रहा। मार्च 2026 में IRNSS-1F सैटेलाइट पर लगी आखिरी वर्किंग एटॉमिक क्लॉक ने भी काम करना बंद कर दिया था, जिसके चलते NavIC की सेवाएं काफी हद तक प्रभावित हो गईं। गौरतलब है कि NaVIC के पहली पीढ़ी (First Generation) के सैटेलाइट्स 2013 से 2018 के बीच लॉन्च किए गए थे। लेकिन कुछ ही सालों में IRNSS सीरीज के उपग्रहों में लगी एटॉमिक क्लॉक्स में बार-बार तकनीकी खामियां आने लगीं। इन समस्याओं से निपटने के लिए ISRO ने 'NVS सीरीज' की शुरुआत की, जो NaVIC के लिए सेकेंड जनरेशन सैटेलाइट्स हैं।
नेविगेशन प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार
ISRO ने मई 2023 में NVS-01 को सफलतापूर्वक उसकी तय कक्षा में स्थापित कर बड़ी कामयाबी हासिल की थी। हालांकि, 2025 में NVS-02 का मिशन पूरा न हो पाने के कारण आगे के लॉन्च (NVS-03, NVS-04 और NVS-05) का शेड्यूल कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। अब NVS-03 की लॉन्चिंग के साथ ही भारत के इस महत्वाकांक्षी नेविगेशन प्रोजेक्ट को एक नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।