प्रमुख मामले: जानिए कैसे शिकार बने शहरवासी
शेयर बाजार में मुनाफे का झांसा, 3.35 लाख डूबे:
कोलार रोड के रहने वाले 42 वर्षीय लैब टेक्नीशियन चंद्रशेखर कान्हेरे फेसबुक पर दिखे एक विज्ञापन के झांसे में आ गए। ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए उनसे संपर्क किया और 'निफ्टीपीडब्लूएम' नाम का एक फर्जी ऐप डाउनलोड कराया। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए कुछ छोटी रकम निकालने दी गई। जब चंद्रशेखर ने भरोसा करके कुल 3.35 लाख रुपये जमा कर दिए, तो ऐप पर 2.82 लाख रुपये का फर्जी मुनाफा दिखाकर उनका अकाउंट फ्रीज कर दिया गया। अब पैसे निकालने के बदले ठग उनसे 5.62 लाख रुपये और मांग रहे हैं।
क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर 69 हजार की चपत:
अवधपुरी निवासी और रेलवे में सीनियर टेक्नीशियन विश्वास गोसावी के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक अधिकारी बताया और क्रेडिट कार्ड की लिमिट 71 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.40 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया। झांसे में आकर गोसावी ने फोन पर आए 6 अंकों का कोड (OTP) शेयर कर दिया, जिसके तुरंत बाद उनके कार्ड से 69 हजार रुपये साफ हो गए।
मोबाइल ऑटो-अपडेट हुआ और खाते से उड़ गए 95 हजार:
कोहेफिजा के रहने वाले मारूफ खान के साथ बेहद अजीबोगरीब वाकया हुआ। 27 सितंबर को उनका मोबाइल अचानक खुद ब खुद अपडेट होने लगा, जिसके बाद उन्होंने फोन को चार्जिंग पर लगाकर छोड़ दिया। जब फोन ठीक से काम नहीं करने लगा तो उन्होंने इसे रिपेयर कराया। इसके बाद जैसे ही यूपीआई चालू किया, उनके होश उड़ गए—अपडेट वाले दिन ही शाम को उनके खाते से 95 हजार रुपये निकाले जा चुके थे।
गलत पहचान बताकर महिला से 1.90 लाख की ठगी:
अंबेडकर नगर की रहने वाली प्रियंका चंदेल को एक अज्ञात व्यक्ति ने गलत पहचान बताकर अपने जाल में फंसाया और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर 1.90 लाख रुपये ठग लिए। पीड़िता ने आशंका जताई है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स में हेरफेर करके इस वारदात को अंजाम दिया है।
अशोका गार्डन और मिसरोद में 4.78 लाख की चपत:
ठगी के दो अन्य बड़े मामलों में अशोका गार्डन निवासी छविंद्र ठाकुर से अज्ञात नंबर से संपर्क कर लगभग 2 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। वहीं, मिसरोद के रहने वाले अजय राजवैध को भी निशाना बनाकर 2.78 लाख रुपये की चपत लगाई गई।

