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Solar panel fraud case in Raipur (Image Source: AI Photo)
Solar panel fraud case in Raipur (Image Source: AI Photo)
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PM Surya Ghar Yojana: सोलर सप्लाई के नाम पर रायपुर के कारोबारी से 22.49 लाख की ठगी, गुजरात की कंपनी पर एफआईआर दर्ज

PM Surya Ghar Yojana: छत्तीसगढ़ के रायपुर में सोलर प्लांट कारोबारी से सूरत की कंपनी ने सोलर उपकरण सप्लाई करने के नाम पर 22.49 लाख रुपये एडवांस ले लिए। तय समय पर सामान नहीं मिलने और रकम वापस नहीं करने पर पीड़ित ने पुरानी बस्ती थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्रकाशित: 24 Sep 2026, 03:51 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
PM Surya Ghar Yojana: छत्तीसगढ़ में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' के तहत कारोबार करने वाले एक व्यवसायी को सूरत की कंपनी से सोलर उपकरण मंगाना महंगा पड़ गया। माल की सप्लाई का झांसा देकर आरोपी ने कारोबारी से 22 लाख 49 हजार रुपए एडवांस में ऐंठ लिए और न तो सामान भेजा और न ही पैसे वापस लौटाए। लगातार टालमटोल से तंग आकर पीड़ित ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद रायपुर की पुरानी बस्ती थाना पुलिस ने सूरत निवासी आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध कायम कर लिया है।

सूरत की कंपनी से ऐसे शुरू हुआ संपर्क 

जानकारी के मुताबिक, धमतरी जिले के सांकरा निवासी दीप चंद साहू रायपुर के भाठागांव इलाके में 'एलडी कंस्ट्रक्शन' नाम से सोलर प्लांट लगाने का काम करते हैं। वे ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग कंपनियों से सोलर पैनल और इनवर्टर खरीदकर सप्लाई करते हैं। इसी दौरान उनके पास सूरत की एक कंपनी से फोन आया। कॉल करने वाले ने छत्तीसगढ़ में वेंडर के तौर पर काम करने की जानकारी ली और दावा किया कि उनकी कंपनी के पास ब्रांडेड सोलर पैनल और बाकी उपकरण किफायती दरों पर उपलब्ध हैं।

सूरत जाकर तय हुआ सौदा, पहली किश्त में दिए 14.79 लाख 

कंपनी की ओर से 'वारी' ब्रांड के सोलर पैनल का रेट (कोटेशन) भेजा गया, जो कारोबारी को वाजिब लगा। इसके बाद 11 मार्च 2026 को दीप चंद अपने एक साथी के साथ सूरत पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात कंपनी के प्रतिनिधि प्रशांत सिंह ठाकुर से हुई। सौदा पक्का होने पर एडवांस पेमेंट की शर्त रखी गई। कारोबारी ने 11 मार्च को दो बार में 4.90-4.90 लाख रुपये और अगले दिन 12 मार्च को 4.99 लाख रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। कुल 14.79 लाख रुपये मिलने के बाद कंपनी ने दावा किया कि 7 से 10 दिनों के अंदर माल रायपुर पहुंच जाएगा।

बाजार में कमी का बहाना, फिर ट्रांसपोर्ट के नाम पर दोबारा फंसाया 

तय समय सीमा बीतने के बाद भी जब रायपुर माल नहीं पहुंचा, तो कारोबारी ने संपर्क किया। इस पर कंपनी ने बाजार में सामान की कमी की बात कहते हुए 28 मार्च तक डिलीवरी का नया भरोसा दिया। 28 मार्च तक भी जब सामान नहीं आया, तो कंपनी ने नया दांव खेला। उन्होंने बताया कि एक बड़ा ट्रक/कंटेनर बुक किया जा रहा है और अगर कारोबारी कुछ और सामान का ऑर्डर दे दें, तो पूरा माल एक साथ एक ही गाड़ी में भेज दिया जाएगा।

झांसे में आकर दिए 7.70 लाख  

कंपनी की बात पर भरोसा करके कारोबारी ने अतिरिक्त सामान का ऑर्डर दे दिया। इसके एवज में 1 अप्रैल को NEFT के ज़रिए 7.70 लाख रुपये कंपनी के दूसरे बैंक खाते में जमा करा दिए गए। इस तरह कारोबारी की ओर से कुल भुगतान 22 लाख 49 हजार रुपये तक पहुंच गया।

ई-मेल पर भी दिया झूठा आश्वासन, मुकरने पर पहुंची पुलिस 

जब फिर भी सामान नहीं आया, तो ई-मेल के जरिए कंपनी ने 21 से 30 अप्रैल के बीच हर हाल में सप्लाई देने या पूरा पैसा लौटाने का लिखित आश्वासन दिया। लेकिन 30 अप्रैल की समयसीमा खत्म होने के बाद भी न माल मिला और न ही पैसे। लगातार गोलमोल जवाब मिलने के बाद पीड़ित ने पुरानी बस्ती थाने का रुख किया।

बैंक खातों और पुलिस जांच की स्थिति 

पीड़ित दीप चंद साहू की शिकायत पर पुलिस ने सूरत (गुजरात) निवासी प्रशांत सिंह ठाकुर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लेन-देन से जुड़े बैंक खातों, ई-मेल, व्हाट्सएप चैट और कोटेशन के दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जिस कंपनी के नाम पर पैसे मंगाए गए थे, उसका वजूद क्या है और ठगी की यह रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई है।
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