Raipur Mantralaya Employees Protest: खटारा बसों के भरोसे मंत्रालयीन कर्मचारी, आग की लपटों के बाद सड़कों पर उतरे
Raipur Mantralaya Employees Protest: एक कर्मचारी बस में आग लगने की घटना के बाद कर्मचारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि जर्जर बसों में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के उन्हें रोजाना सफर करना पड़ रहा है। हादसे के बाद प्रशासन ने 31 अक्टूबर से पुरानी बसों का संचालन बंद करने की बात कही है।
प्रकाशित: 24 Sep 2026, 01:25 PM· 3 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
स्रोत: स्वयं रिपोर्ट
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Raipur Mantralaya Employees Protest: राजधानी रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ मंत्रालय के कर्मचारियों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे नजर आ रही है। बुधवार शाम एक बड़ा हादसा टलने के बाद गुरुवार को कर्मचारियों का सब्र का बांध टूट गया। मंत्रालय कर्मचारी संघ के बैनर तले दर्जनों कर्मचारियों ने दफ्तर के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया और 'रघुपति राघव राजा राम' गाकर सोए हुए प्रशासन को जगाने की कोशिश की। यह पूरा बखेड़ा बुधवार शाम घटी उस खौफनाक घटना के बाद शुरू हुआ, जब करीब 35 कर्मचारियों को लेकर कबीर नगर जा रही एक सिटी बस में अचानक आग लग गई। गनीमत यह रही कि बस के रवाना होने से पहले ही निचले हिस्से से धुआं उठते देख कर्मचारी वक्त रहते बाहर कूद पड़े। देखते ही देखते अगले 20 मिनट में बस धू-धू कर जलकर राख हो गई। शुरुआती जांच में हादसे की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।
आग बुझाने का जरिया तक नहीं, परिसर से लाने पड़े सिलेंडर
घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। उनका आरोप है कि आपात स्थिति से निपटने के लिए बस के भीतर एक फायर एक्सटिंग्विशर तक मौजूद नहीं था। जब लपटें तेज हुईं, तो मंत्रालय परिसर से 10-10 किलो के सिलेंडर लाकर आग पर काबू पाने का नाकाम प्रयास किया गया। बाद में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने पहुंचकर आग बुझाई, लेकिन तब तक बस पूरी तरह स्वाहा हो चुकी थी। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वे लगातार रजिस्ट्रार शाखा और एनआरडीए (NRDA) के अफसरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन मेंटेनेंस के नाम पर केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया जाता है।
रायपुर मंत्रालय में कर्मचारियों का प्रदर्शन14 साल पुरानी गाड़ियां, टपकती छतें और टूटे दरवाजे
इस हादसे ने रायपुर नगर निगम और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिनमें सुरक्षित सफर की बात कही जाती है। पड़ताल में सामने आया कि कर्मचारी रोजाना जिन गाड़ियों में अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं, वे 14 साल से भी ज्यादा पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। बारिश के दिनों में तो स्थिति और दयनीय हो जाती है। बसों की छतों से पानी टपकता है, जिसके कारण कर्मचारियों को सीटों पर पॉलीथिन बिछाकर बैठना पड़ता है। कई गाड़ियों के दरवाजे तक ठीक से बंद नहीं होते और फ्लोर पूरी तरह गल चुका है। जिस बस में बुधवार को आग लगी, वह भी 14 साल पुरानी खटारा गाड़ी ही थी।
2012 का ठेका और मियाद पूरी कर चुकीं बसें
रायपुर नगर निगम ने साल 2012 में श्रीदुर्गा मां ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को 98 बसों के संचालन की जिम्मेदारी 10 साल के ठेके पर दी थी। 2022 में टेंडर खत्म होने के बावजूद इसे आगे बढ़ा दिया गया। वर्तमान में कंपनी की अधिकतर गाड़ियां 15 साल की मियाद पूरी करने की कगार पर हैं। 5 बसें पहले ही कबाड़ होकर ऑफरोड हो चुकी हैं और बची हुई 83 बसों के भरोसे पूरा परिवहन खींचा जा रहा है।
31 अक्टूबर से बंद होंगी बसें
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल कमिश्नर लोकेश्वर साहू का कहना है कि निगम की ओर से चलाई जा रही बसें अब पूरी तरह कंडम स्थिति में पहुंच चुकी हैं। शासन को इस सेवा को बंद करने के लिए आधिकारिक पत्र भेजा जा चुका है। 31 अक्टूबर के बाद इन पुरानी बसों का संचालन पूरी तरह से रोक दिया जाएगा।