India vs Sri Lanka: 503 रन और फॉलोऑन के बाद भी नहीं जीता भारत, इन गलतियों से ड्रॉ हुआ दूसरा टेस्ट
India vs Sri Lanka: भारत ने पहली पारी में 503 रन बनाने और श्रीलंका को फॉलोऑन देने के बावजूद दूसरा टेस्ट नहीं जीता। कुलदीप यादव की कमी, शुभमन गिल की रक्षात्मक कप्तानी और निचले क्रम को आउट करने में गेंदबाजों की नाकामी के कारण मुकाबला ड्रॉ रहा।
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कीर्तिमान डेस्क | यशोदा साहू
28 Aug 2026, 09:54 AM
खेल डेस्क
India vs Sri Lanka: कोलंबो में भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया दूसरा टेस्ट मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। भारतीय टीम ने पहली पारी में नौ विकेट पर 503 रन बनाकर पारी घोषित की और श्रीलंका को फॉलोऑन खेलने के लिए भी मजबूर किया। इसके बावजूद शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम जीत हासिल नहीं कर सकी। टेस्ट क्रिकेट में पहली पारी में 500 से अधिक रन बनाने और विपक्षी टीम को फॉलोऑन देने के बाद जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जाती है। भारतीय टीम मैच में लंबे समय तक बेहतर स्थिति में थी, लेकिन अंतिम दो दिनों में उसकी रणनीति प्रभावी साबित नहीं हुई। इस ड्रॉ के कारण भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में भी फायदा नहीं मिला और टीम पांचवें स्थान पर बनी हुई है।
कुलदीप यादव की कमी पड़ी भारी
दूसरे टेस्ट में कुलदीप यादव की जगह सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। कुलदीप के बाहर रहने की वजह उनकी खराब तबीयत बताई गई। हालांकि, यदि टीम प्रबंधन ने उन्हें रणनीतिक कारणों से बाहर रखा था, तो इस फैसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसी पिच पर एक अनुभवी मुख्य स्पिनर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती थी। कुलदीप बल्लेबाजों को अपनी विविधता से परेशान करने के साथ बीच के ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता रखते हैं। उनकी जगह शामिल किए गए सारांश जैन मुकाबले में अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके। श्रीलंका की दूसरी पारी के दौरान भारतीय टीम को एक ऐसे गेंदबाज की कमी साफ महसूस हुई, जो साझेदारियां तोड़ सके।
भारत-श्रीलंका टेस्ट ड्रॉशुभमन गिल का रक्षात्मक रवैया
मैच के चौथे दिन पासिंदु सूर्याबंदारा और कामिंदु मेंडिस ने शतकीय साझेदारी कर श्रीलंका को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला। इस दौरान भारतीय टीम की फील्डिंग काफी रक्षात्मक दिखाई दी। कप्तान शुभमन गिल ने बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के बजाय रन रोकने की रणनीति अपनाई, जिसका फायदा मेजबान टीम को मिला। पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने भी गिल की कप्तानी पर सवाल उठाए। सोनी स्पोर्ट्स पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि लंच से टी-ब्रेक के बीच गिल के नेतृत्व की असली परीक्षा हुई, लेकिन श्रीलंका के जवाबी आक्रमण के बाद भारतीय टीम जल्दी रक्षात्मक हो गई। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थिति में गेंदबाजों को विकेट लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए आक्रामक फील्ड लगाई जानी चाहिए थी।
पांचवें दिन का खेल शुरू होने तक श्रीलंका के छह विकेट गिर चुके थे और उसके पास केवल 16 रन की बढ़त थी। उस समय भारत के पास मैच जीतने का अच्छा अवसर था। उम्मीद थी कि भारतीय गेंदबाज श्रीलंका के निचले क्रम को जल्दी समेट देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केशरा नुवंता और सोनल दिनुषा ने भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना किया। पहले सत्र में भारतीय टीम विकेट लेने का कोई ठोस मौका नहीं बना सकी। दूसरे सत्र की शुरुआत में मानव सुतार ने नुवंता को आउट कर साझेदारी तोड़ी, लेकिन इसके बाद भी श्रीलंका की पारी को जल्द समाप्त नहीं किया जा सका।
श्रीलंका के पुछल्ले बल्लेबाजों ने दिखाया धैर्य
प्रभात जयसूर्या ने 28 गेंदों का सामना किया, जबकि लाहिरू कुमारा ने 90 गेंदें खेलकर भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। लाहिरू और सोनल की जोड़ी ने करीब 28 ओवर तक बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका को सुरक्षित स्थिति में पहुंचा दिया। भारतीय गेंदबाज श्रीलंका के पुछल्ले बल्लेबाजों के खिलाफ प्रभावी योजना नहीं बना सके। लगातार एक जैसी गेंदबाजी, रक्षात्मक फील्ड और विकेट निकालने की स्पष्ट रणनीति का अभाव टीम पर भारी पड़ा। मजबूत स्थिति में होने के बावजूद मुकाबला ड्रॉ होना भारतीय टीम प्रबंधन और कप्तान शुभमन गिल के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया है।