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भारत 300 नई K9 वज्र-टी तोपें खरीदने की तैयारी
भारत 300 नई K9 वज्र-टी तोपें खरीदने की तैयारी
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भारतीय सेना : लद्दाख में दमदार प्रदर्शन के बाद K9 वज्र पर सेना का बढ़ा भरोसा

भारतीय सेना करीब 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 नई K9 वज्र-टी स्वचालित तोपें खरीदने की तैयारी कर रही है। लद्दाख में सफल प्रदर्शन के बाद सेना का इस प्रणाली पर भरोसा बढ़ा है। नई तोपों की तैनाती से चीन और पाकिस्तान सीमा पर सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता और जवाबी कार्रवाई की शक्ति में बड़ा इजाफा हो सकता है। साथ ही यह परियोजना मेक इन इंडिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी नई गति देगी।

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प्रकाशित: 10 Jun 2026, 05:51 PM · अपडेट: 04 Oct 2026, 12:08 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
भारतीय सेना अपनी आर्टिलरी शक्ति को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सेना करीब 23,000 करोड़ रुपये की लागत से  300 नई K9 वज्र-टी स्वचालित हॉवित्जर तोपों की खरीद की तैयारी कर रही है। यह वही अत्याधुनिक तोप प्रणाली है जिसने पूर्वी लद्दाख की कठिन भौगोलिक और मौसमीय परिस्थितियों में बेहतरीन प्रदर्शन कर सेना का भरोसा जीता है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद यह हाल के वर्षों में भारतीय सेना की सबसे बड़ी आर्टिलरी आधुनिकीकरण परियोजनाओं में शामिल हो सकती है भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर लगातार बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए सेना अपनी लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को और मजबूत करना चाहती है। नई K9 वज्र-टी तोपों की तैनाती से सेना की जवाबी कार्रवाई और आक्रामक क्षमता दोनों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

K9 वज्र-टी

K9 वज्र-टी एक 155 मिमी/52 कैलिबर की स्वचालित ट्रैक्ड हॉवित्जर तोप है। इसे दक्षिण कोरिया की हानव्हा एयरोस्पेस द्वारा विकसित K9 थंडर प्लेटफॉर्म के आधार पर भारत के लिए तैयार किया गया है। भारत में इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो द्वारा किया जाता है यह तोप अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम, तेज गतिशीलता और लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने की क्षमता से लैस है। K9 वज्र-टी कुछ ही मिनटों में अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है।

रेगिस्तान के लिए खरीदी गई

जब भारतीय सेना ने पहली बार K9 वज्र-टी को शामिल किया था, तब इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान और पश्चिमी सीमाओं के रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनाती था। लेकिन वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ बढ़े तनाव के बाद सेना ने इन तोपों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया कठोर ठंड, कम ऑक्सीजन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी K9 वज्र-टी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। सेना के परीक्षणों और ऑपरेशनल अनुभवों ने साबित किया कि यह प्रणाली केवल रेगिस्तान ही नहीं बल्कि हिमालयी क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है।

300 नई तोप

वर्तमान में भारतीय सेना के पास लगभग 100 K9 वज्र-टी तोपें हैं। प्रस्तावित 300 अतिरिक्त तोपों के शामिल होने के बाद यह संख्या कई गुना बढ़ जाएगी इससे सेना को विभिन्न मोर्चों पर एक साथ आर्टिलरी सहायता उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी की मारक क्षमता आधुनिक युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाती है नई तोपों की तैनाती से सेना सीमा क्षेत्रों में अधिक प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध करा सकेगी और जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों को दूर से निशाना बना सकेगी।

चीन और पाकिस्तान 

भारत को वर्तमान समय में उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान से सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है ऐसे में सेना ऐसी हथियार प्रणालियों पर विशेष ध्यान दे रही है जो तेजी से तैनात की जा सकें और कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी रहें K9 वज्र-टी की गतिशीलता और फायरिंग क्षमता इसे दोनों मोर्चों के लिए उपयोगी बनाती है। सेना का मानना है कि भविष्य के संघर्षों में तेज और सटीक आर्टिलरी फायर निर्णायक साबित हो सकता है।

मेक इन इंडिया 

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसका अधिकांश निर्माण भारत में किया जाएगा  K9 वज्र-टी कार्यक्रम को देश की रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने वाले प्रमुख उदाहरणों में गिना जाता है नई खरीद से भारतीय उद्योगों को बड़े पैमाने पर काम मिलेगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

आधुनिक युद्ध 

हाल के वर्षों में दुनिया के कई संघर्षों ने दिखाया है कि आर्टिलरी आज भी युद्ध का एक निर्णायक हथियार बनी हुई है लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाली तोपें सैनिकों को आगे बढ़ने से पहले दुश्मन की रक्षा व्यवस्था को कमजोर करने में मदद करती हैं इसी वजह से भारतीय सेना भी अपने आर्टिलरी बेड़े को आधुनिक बनाने पर लगातार ध्यान दे रही है K9 वज्र-टी की अतिरिक्त खरीद इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

सरकार की मंजूरी का इंतजार

फिलहाल यह प्रस्ताव स्वीकृति प्रक्रिया में है। रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि परियोजना को हरी झंडी मिलती है तो भारतीय सेना की फायरपावर में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
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