भारतीय सशस्त्र बलों में पिछले कई वर्षों से चर्चा का विषय बने थियेटर कमांड मॉडल को अब जमीन पर उतारने की दिशा में गतिविधियां तेज हो हैं करीब छह वर्ष पहले सामने आए इस विचार को देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने आगे बढ़ाया था। अब अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में मौजूदा जनरल अनिल चौहान ने इसका एक विस्तृत रुपरेखा तैयार किया है बताया जा रहा है कि यह ब्लूप्रिंटमें रक्षा मंत्रालय के पास पहुंच चुका है और अब केंद्र सरकार को इस पर अंतिम निर्णय ले सकती है यदि यह योजना लागू होती है तो भारतीय सेना के संगठनात्मक ढांचे में आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में थल सेना, वायु सेना और नौसेना अलग-अलग कमांड संरचनाओं के तहत कार्य कर रही हैं, लेकिन नई व्यवस्था में तीनों सेनाओं की क्षमताओं को एकीकृत कर थियेटर कमांड के अधीन लाया जाएगा।
थियेटर कमांड
थियेटर कमांड एक ऐसी सैन्य व्यवस्था है जिसमें किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र या दूरदर्शिता के साथ तीनों सेनाओं की ताकत को एक ही कमांडर के नेतृत्व में संचालित किया जाय इसका उद्देश्य युद्ध या संकट की स्थिति में जल्द से जल्द निर्णय लेना और संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है मौजूदा हालत में सेना, नौसेना और वायु सेना की अपनी-अपनी कमांड होती हैं। किसी संयुक्त अभियान के दौरान विभिन्न स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता पड़ती है। थियेटर कमांड इस प्रक्रिया को सरल बनाती है और तीनों सेनाओं को एकीकृत तरीके से कार्य करने का अवसर देती है।
कैसे काम करती हैं भारतीय सेनाएं
फिलहाल भारतीय सशस्त्र बल कुल 17 प्रमुख कमांड के माध्यम से संचालित होते हैं इनमें थल सेना की सात, वायु सेना की सात और नौसेना की तीन कमांड शामिल हैं हर कमांड का अपना नियमावली, दायित्व और संचालन के तरीके होते है संयुक्त सैन्य अभियानों के दौरान तीनों सेनाओं को एक साथ काम करना पड़ता है, लेकिन कमांड संरचना अलग-अलग होने के कारण कई स्तरों पर सामंजस्यता की आवश्यकता होती है यही कारण है कि लंबे समय से एकीकृत कमांड व्यवस्था की मांग उठती रही है।
तीन थियेटर कमांड का प्रस्ताव
प्रस्तावित रुपरेखा में 17 कमांड को पुनर्गठित कर तीन प्रमुख थियेटर कमांड बनाई जाएगी इनमे से पहली कमांड चीन सीमा और उत्तरी क्षेत्र से जुड़े सैन्य अभियानों पर केंद्रित हो होगी, दूसरी कमांड पाकिस्तान सीमा और पश्चिमी मोर्चे की जिम्मेदारी संभाल सकती है। तीसरी कमांड समुद्री क्षेत्र और हिंद महासागर में भारत के हितों की रक्षा के लिए बनाई जा जा रही है इसके अतिरिक्त कुछ योजनाबद्ध और युद्ध अभ्यास संबंधी कमांड अलग स्वरूप में बनाए रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
नई व्यवस्था
आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है अब केवल जमीन, समुद्र या आकाश में अलग-अलग लड़ाई नहीं होती, बल्कि सभी क्षेत्रों में एक साथ अभियान चलाए जाते हैं ऐसी स्थिति में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल किसी भी देश की सैन्य क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है थियेटर कमांड का उद्देश्य भी यही है कि युद्ध के समय निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो और संसाधनों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से हो सके।
कई देशों में लागू है मॉडल
अमेरिका, चीन, रूस और कई अन्य देशों ने पहले से थियेटर कमांड व्यवस्था अपनाई हुई है अमेरिकी सेना वर्षों से विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए एकीकृत कमांड संरचना के तहत कार्य करती है चीन ने भी हाल के वर्षों में अपनी सेना का व्यापक पुनर्गठन कर थियेटर कमांड मॉडल लागू किया है इससे उसकी सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार हुआ है। भारत भी बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल को देखते हुए इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
CDS की भूमिका
थियेटर कमांड योजना को आगे बढ़ाने में CDS की भूमिका सर्वोच्च है जनरल अनिल चौहान ने पिछले कुछ वर्षों में सेना, नौसेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा चल रही है। तैयार किए गए ब्लूप्रिंट में कमांड संरचना, जिम्मेदारियों और सिस्टम का विस्तृत रुपरेखा भी शामिल है अब रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार को इस पर अंतिम निर्णय लेना है। यदि थियेटर कमांड व्यवस्था लागू होती है तो भारतीय सेनाओं की संयुक्त युद्ध क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे सीमाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सकेगी।
