Jantar Mantar: महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच, ACP पर उंगली
Jantar Mantar: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक पत्रकार ने ACP विवेक भगत पर शारीरिक दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। शिकायत पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रकाशित: 04 Oct 2026, 03:38 PM· 3 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Jantar Mantar: देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर विरोध-प्रदर्शनों और विवादों का केंद्र बन गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालने तैनात पुलिसकर्मियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदर्शन की कवरेज कर रही तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने निष्पक्ष जांच का हवाला देते हुए पूरी शिकायत क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।
ACP विवेक भगत पर सीधे आरोप, मौके पर महिला पुलिसकर्मी नहीं होने का दावा
पीड़ित पत्रकारों में से एक ने मीडिया के सामने अपनी आपबीती साझा करते हुए सीधे असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकार के मुताबिक, जब वह जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की घटना को कवर कर रही थीं, उस दौरान वहां सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा था। आरोप है कि मौके पर महिला प्रदर्शनकारियों या पत्रकारों को संभालने के लिए पर्याप्त महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं। जब पत्रकार ने इस संबंध में ड्यूटी पर तैनात एसीपी विवेक भगत से सवाल पूछा, तो उन्होंने न सिर्फ सवाल को टाल दिया बल्कि शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार करते हुए उन्हें पीछे धकेल दिया।
जंतर-मंतर में प्रदर्शनथाने में नहीं हुई सुनवाई, PCI ने जताया कड़ा ऐतराज
महिला पत्रकारों का यह भी कहना है कि घटना के तुरंत बाद वे शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंचीं, लेकिन अधिकारियों ने कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की। इस घटना पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने भी कड़ा रुख अपनाया है। मीडियाकर्मियों के साथ पुलिस के इस रवैये पर गहरी चिंता जताते हुए PCI ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। निकाय ने साफ कहा कि पत्रकारों को बिना किसी डर या दबाव के अपना काम करने और घटनाओं को दर्ज करने की पूरी आजादी होनी चाहिए। रविवार को मामले की जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों ने बताया कि 3 अक्टूबर को हुई इस घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है। हालांकि, राजधानी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में महिला पत्रकारों के साथ हुए इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस के रवैये पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।