CJP Protest: राजधानी दिल्ली एक बार फिर बड़े राजनीतिक प्रदर्शन और हंगामे की गवाह बनी। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के चलते वीकेंड पर दिल्ली की रफ्तार मानो थम सी गई। रेल और मेट्रो सेवाओं के बाधित होने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच बाजारों में ऐसा सन्नाटा पसरा कि व्यापारी वर्ग सिर पकड़ कर बैठ गया। स्थिति यह रही कि शनिवार के दिन, जो खरीदारी के लिए सबसे व्यस्त माना जाता है, बाजार पूरी तरह वीरान नजर आए। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुमान के मुताबिक, इस एक दिन के हंगामे और बंदी के कारण दिल्ली के व्यापार को करीब 2000 करोड़ रुपये का करारा झटका लगा है।
इन बड़े बाजारों में रहा ताला और सन्नाटा
सुरक्षा के लिहाज से और पुलिस की सख्ती के चलते प्रशासन ने राजधानी के कई प्रमुख बाजारों को बंद कराने का फैसला लिया था। कनॉट प्लेस, खान मार्केट, पालिका बाजार, करोल बाग और जनपथ जैसे देश-विदेश में मशहूर खरीदारी केंद्र दिनभर सूने पड़े रहे। भले ही सुबह कुछ देर के लिए दुकानें खुली हों, लेकिन मेट्रो बंद होने और भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण खरीदार इन इलाकों तक पहुंच ही नहीं सके। नतीजतन, दुकानदारों को ग्राहकों का इंतजार करते-करते पूरा दिन बिताना पड़ा।
दिवाली से ठीक पहले कारोबारियों की बढ़ी धड़कनें
अक्टूबर का यह महीना व्यापार जगत के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। नवरात्रि, रामलीला और ठीक सामने खड़ी दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के इस सीजन में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वैलरी और गिफ्ट आइटम्स की बंपर मांग रहती है। ऐसे में त्योहारी सीजन के पीक टाइम पर बाजार बंद रहना व्यापारियों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। दुकानदारों का दर्द साफ झलक रहा है—उनका कहना है कि अगर त्योहारी सीजन में इस तरह आए दिन बाजार बंद रहे, तो वे अपने कर्मचारियों की सैलरी, दुकान का किराया और बैंक के ब्याज चुकाने लायक भी नहीं बचेंगे। दुकान बंद होने के बावजूद फिक्स्ड खर्च तो उठाने ही पड़ते हैं, जिससे सीधा असर उनकी जेब पर पड़ता है।
CTI ने की हाथ जोड़कर अपील: 'त्योहार तक रोकें प्रदर्शन'
व्यापारियों की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए CTI ने मोर्चा संभाला है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल ने CJP नेता अभिजीत दीपके समेत तमाम राजनीतिक दलों को एक खुला पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से यह अपील की गई है कि दिवाली तक दिल्ली में किसी भी तरह के धरना-प्रदर्शन से बचा जाए। संगठन का तर्क है कि त्योहारी सीजन में यदि व्यापार यूं ही प्रभावित होता रहा, तो राजधानी से जुड़े लाखों व्यापारियों और उनसे जुड़े कामगारों की रोजी-रोटी पर संकट गहरा जाएगा। अब देखना यह होगा कि राजनीतिक दल व्यापारियों की इस पीड़ा को समझते हुए त्योहारी सीजन में शांति बनाए रखते हैं या फिर राजधानी को आगे भी ऐसे ही जाम और बंद का सामना करना पड़ेगा।







