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Dr. Shivkumar Dahariya (Image Source - Keertiman Media)
Dr. Shivkumar Dahariya (Image Source - Keertiman Media)
रायपुर संभाग

Jhiram Ghati Case : डॉ शिवकुमार डहरिया ने NIA जांच पर उठाए सवाल

Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी हत्याकांड में 13 साल बाद 10 आरोपियों की दोषसिद्धि हुई है। फैसले के बाद डॉ. शिवकुमार डहरिया ने NIA जांच पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या हमले के पीछे की पूरी साजिश का सच सामने आया है।

कीर्तिमान न्यूज
06 Sep 2026, 01:46 PM
आरंग
Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी हत्याकांड में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर इस मामले की जांच को लेकर बहस शुरू हो गई है। 13 साल पुराने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने जांच की दिशा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दोषियों को सजा मिलना जरूरी है, लेकिन क्या इससे झीरम घाटी की पूरी सच्चाई सामने आ गई है ?

25 मई 2013 को हुआ था नक्सली हमला 

कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर झीरम घाटी में नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल सहित कई नेता, कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।  

NIA जांच और अदालत के फैसले पर सवाल

घटना की जांच बाद में NIA ने अपने हाथ में ली। वर्षों चली जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब 10 आरोपियों की दोषसिद्धि हुई है। अदालत के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, डॉ. डहरिया ने इसी मौके पर जांच की व्यापकता को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका सवाल है कि क्या जांच केवल हमले में शामिल आरोपियों तक सीमित रही, या इसके पीछे संभावित बड़े षड्यंत्र, सूचना तंत्र और मददगारों की भूमिका की भी पड़ताल की गई? डहरिया का कहना है कि झीरम के शहीदों को वास्तविक न्याय तभी मिलेगा, जब हमले के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आए।

क्या पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ ? 

झीरम घाटी कांड को लेकर छत्तीसगढ़ में वर्षों से यह सवाल राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है कि घटना को केवल नक्सली हमला मानकर जांच पूरी मानी जाए या इसके पीछे संभावित व्यापक साजिश की हर कड़ी को भी जांच के दायरे में लाया जाए। डॉ. डहरिया के सवालों ने इसी पुराने मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। 

फैसले के बाद आगे क्या ? 

13 साल बाद आया फैसला झीरम मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव है। दोषियों की जिम्मेदारी तय होने से पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद मजबूत हुई है। मगर राजनीतिक तौर पर अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला झीरम की पूरी कहानी का अंत है, या घटना के पीछे की साजिश को लेकर उठते रहे सवालों के जवाब अभी बाकी हैं? झीरम घाटी का जख्म छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज भी गहरा है। अदालत के फैसले के बाद डॉ. डहरिया के सवालों ने एक बार फिर सरकार और जांच एजेंसी के सामने यही चुनौती खड़ी कर दी है कि दोषियों तक पहुंचने के बाद क्या अब झीरम की पूरी साजिश का सच भी सामने आएगा ?
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