राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने सोमवार को शहर के दो मदरसों और यतीमखानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, भोजन, साफ-सफाई और रहन-सहन की व्यवस्थाओं की गहन जांच की गई।
निरीक्षण की खबर मिलते ही संबंधित संस्थानों में हड़कंप की स्थिति बन गई। बाल आयोग की टीम ने बैजनाथ पारा स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन और दारुल यतामा सहित पुलिस पेट्रोल पंप के पास संचालित मदरसा इदारा-ए-सरिया यतीम खाना का निरीक्षण किया। आयोग की अध्यक्ष ने बच्चों से सीधे बातचीत कर उनकी दिनचर्या, पढ़ाई के घंटे, भोजन व्यवस्था और रहने की स्थिति की जानकारी ली।
जांच के दौरान सामने आया कि बच्चों को सुबह जल्दी उठाकर देर रात तक लगातार पढ़ाई कराई जा रही थी। आयोग ने इसे बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक बताया। निरीक्षण टीम ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के साथ पर्याप्त आराम, खेलकूद और मनोरंजन का समय मिलना भी जरूरी है। लगातार दबावपूर्ण दिनचर्या बच्चों के विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
साफ-सफाई और रसोई व्यवस्था पर उठे सवाल
निरीक्षण में परिसर और रसोई क्षेत्र की साफ-सफाई भी संतोषजनक नहीं पाई गई। कई जगहों पर गंदगी नजर आई, जबकि बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी आयोग ने गंभीर नाराजगी जताई। टीम ने कहा कि बच्चों को पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बच्चों से सफाई और अन्य दैनिक कार्य कराए जा रहे थे। बाल आयोग ने इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की। आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट कहा कि किसी भी संस्थान में बच्चों से श्रम कार्य कराना पूरी तरह अनुचित है और यह बाल संरक्षण नियमों के खिलाफ है।
संस्थानों को दिए गए सख्त निर्देश
बाल आयोग ने संबंधित संस्थानों के संचालकों को तत्काल व्यवस्थाओं में सुधार करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि बच्चों की शिक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक विकास का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। साथ ही बाल संरक्षण से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
बाल आयोग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में राजधानी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी मदरसों, छात्रावासों और यतीमखानों का निरीक्षण अभियान जारी रहेगा। आयोग का कहना है कि बच्चों के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
