Mahasamund Dussehra: दशहरे का इंतजार केवल रावण दहन के लिए ही नहीं, बल्कि रामलीला के मंचन के लिए भी किया जाता रहा है। एक समय था, जब गांवों में रामायण के प्रसंग देखने के लिए लोग बड़ी संख्या में जुटते थे। बदलते दौर में मनोरंजन के साधन जरूर बदले हैं, लेकिन रामलीला से जुड़ी आस्था और परंपरा आज भी कायम है। महासमुंद के नया रावण भाटा में इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए कलाकार जुटे हुए हैं।
यहां दशहरे के अवसर पर 40 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। दशहरा आयोजन समिति के संचालक चंद्रशेखर साहू के अनुसार, आयोजन की तैयारियां जारी हैं। वहीं, दिशा नाट्य मंच की ओर से रामलीला का मंचन किया जाएगा। इसके लिए कलाकार पिछले 15 दिनों से अभ्यास कर रहे हैं।
दशहरे पर होगा 40 फीट के रावण का दहन
नया रावण भाटा में दशहरे का प्रमुख आकर्षण रावण दहन रहेगा। इस बार 40 फीट ऊंचे रावण का पुतला जलाया जाएगा। दशहरा आयोजन समिति कार्यक्रम की तैयारियों में जुटी है। रावण दहन के साथ होने वाला रामलीला मंचन भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।साउंड-लाइटिंग में होगा नया प्रयोग
दिशा नाट्य मंच के कलाकार रामलीला की प्रस्तुति को बेहतर बनाने के लिए लगातार रिहर्सल कर रहे हैं। मंचन में किष्किंधा कांड से लेकर लंका कांड तक के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। कलाकार संवादों के अभ्यास के साथ अपने किरदारों के हाव-भाव और अभिनय पर भी ध्यान दे रहे हैं।
दिशा नाट्य मंच के संचालक ने बताया कि पिछले 15 दिनों से रिहर्सल चल रही है। दशहरे के दिन रामलीला का मंचन और रावण दहन होगा। इस बार साउंड और लाइटिंग की व्यवस्था में भी नए प्रयोग किए जा रहे हैं, ताकि मंच पर दिखने वाले प्रसंग अधिक प्रभावशाली बनें और दर्शकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
रामलीला के जरिए जीवित रखी जा रही परंपरा
रामलीला लंबे समय से भारतीय लोकसंस्कृति का हिस्सा रही है। पहले गांवों में स्थानीय कलाकार ही राम, लक्ष्मण, सीता, रावण और मेघनाद जैसे पात्रों की भूमिका निभाते थे। आयोजन की तैयारी में पूरा गांव सहयोग करता था और रामलीला लोगों के आपसी जुड़ाव का माध्यम बनती थी।
आज मनोरंजन के आधुनिक साधनों के बीच पारंपरिक मंचन को जारी रखना आसान नहीं है। इसके बावजूद दिशा नाट्य मंच के कलाकार अपनी मेहनत और समर्पण से इस विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उनके लिए यह केवल अभिनय नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति से जुड़ने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। दशहरे पर नया रावण भाटा में रावण दहन के साथ रामलीला का मंचन इसी सांस्कृतिक परंपरा की झलक पेश करेगा।







