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All three accused acquitted in liquor adulteration case (Image Source: AI Photo)
All three accused acquitted in liquor adulteration case (Image Source: AI Photo)
महासमुंद

Mahasamund news: शराब मिलावट मामले में आबकारी विभाग की कमज़ोर पैरवी का फायदा, कोर्ट ने तीनों को किया बरी

Mahasamund news: बसना शराब मिलावट और सील से छेड़छाड़ मामले में अदालत ने तीनों आरोपी कर्मचारियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 02 Sep 2026, 09:27 AM · अपडेट: 02 Oct 2026, 10:26 AM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Mahasamund news: शराब में पानी मिलाने और सील से छेड़छाड़ के बहुचर्चित मामले में महासमुंद जिले की बसना अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (बसना) मंजीत जांगड़े की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए तीनों आरोपी कर्मचारियों—कमलेश सेठ, सलित प्रधान और अरविंद पटेल को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि आबकारी विभाग आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। घटना 6 सितंबर 2022 की है। 

शीशियों की सील मिली थी ढीली और क्षतिग्रस्त 

आबकारी विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बसना स्थित सरकारी देशी/विदेशी शराब दुकान में मिलावटी शराब बेची जा रही है। सूचना के आधार पर आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश कुमार वर्मा की अगुआई में टीम ने दुकान पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान टीम ने काउंटर से 'गोवा स्पेशल व्हिस्की' की दो शीशियां (कुल 360 एमएल)—जिनकी सील ढीली और क्षतिग्रस्त पाई गई थी—तथा आधा लीटर पानी से भरी एक प्लास्टिक की बोतल जब्त की। 

कोर्ट के सामने जांच प्रक्रिया की खामियां

मौके पर जब हाइड्रोमीटर से शराब की तीव्रता जांच की गई, तो वह तय मानकों से अलग पाई गई। इसी आधार पर आबकारी विभाग ने दुकान पर कार्यरत कर्मचारी कमलेश सेठ, सलित प्रधान और अरविंद पटेल के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 38(क), 39(ख) और 39(ग) के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (आबकारी विभाग) का ढांचा ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। कोर्ट के सामने जांच प्रक्रिया की कई ऐसी गंभीर खामियां आईं, जिन्होंने आबकारी विभाग की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े कर दिए।
  • मुख्य गवाहों का मुकरना: जब्ती और गिरफ्तारी की कार्रवाई के लिए बनाए गए मुख्य स्वतंत्र गवाह—कमल पटेल और युवराज सेठ—अदालत में अपने बयानों से पलट (हॉस्टाइल) गए। उन्होंने जज के सामने स्पष्ट किया कि वे आरोपियों को पहचानते तक नहीं हैं और न ही उनके सामने ऐसी कोई भी जब्ती की गई थी।
  • नापतौल का कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं: जांच अधिकारी (विवेचक) आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश वर्मा ने जिरह (क्रॉस एग्जामिनेशन) के दौरान यह स्वीकार किया कि मौके पर की गई नापतौल की प्रक्रिया का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या दस्तावेज तैयार ही नहीं किया गया था।

  • मालखाना रजिस्टर से गायब थी एंट्री: आबकारी टीम यह साबित करने में पूरी तरह असमर्थ रही कि जब्त की गई शराब और बोतल को नियम अनुसार मालखाने में सुरक्षित जमा कराया गया था या नहीं। चालान के साथ मालखाना रजिस्टर की प्रति संलग्न ही नहीं की गई थी।

  • विभागीय कर्मचारी को ही बनाया गवाह: जांच अधिकारी ने अदालत में माना कि मामले में जिस कमल पटेल को स्वतंत्र गवाह दर्शाया गया था, वह असल में आबकारी विभाग का ही कर्मचारी था।

  • अदालत की सख्त टिप्पणी और अंतिम फैसला 

    न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजीत जांगड़े ने अपने 14 पन्नों के विस्तृत फैसले में आबकारी विभाग की ढीली कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब तक निष्पक्ष और स्वतंत्र गवाहों का समर्थन न मिले, तब तक आबकारी विभाग की पूरी जांच प्रक्रिया संदेह के दायरे में रहती है। गवाहों के बयानों में आए विरोधाभास और दस्तावेजी सबूतों की कमी के कारण आरोपियों पर दोष साबित नहीं होता। अदालत ने तीनों आरोपियों कमलेश सेठ, सलित प्रधान और अरविंद पटेल को बाइज़्ज़त बरी करते हुए उनके जमानत मुचलके रद्द कर दिए। इसके साथ ही, जब्त की गई शराब की शीशियों और पानी की बोतल को मूल्यहीन मानते हुए अपील अवधि समाप्त होने के बाद नष्ट करने के निर्देश दिए हैं। 
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