Mahasamund News: ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से गौरव की बढ़ी आमदनी, बने प्रेरणा
Mahasamund News: महासमुंद जिले के किसान गौरव कुठारे ने आधुनिक तकनीकों के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर सफलता हासिल की है। 23 टन उत्पादन से उन्होंने करीब 2.65 लाख रुपये की आमदनी अर्जित की। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों के उपयोग से लागत नियंत्रित हुई और खेती अधिक लाभकारी बनी।
Mahasamund News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के दौरान कृषि क्षेत्र के विकास, किसानों की आय में वृद्धि तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी दिशा में केंद्र एवं राज्य शासन की योजनाओं से लाभान्वित होकर महासमुन्द जिले के किसान पारंपरिक खेती के साथ
उद्यानिकी फसलों और
आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में बागबाहरा विकासखण्ड के ग्राम गुलझर के कृषक गौरव कुठारे ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से बेहतर आमदनी अर्जित की है।
आधुनिक तकनीकों से खेती में मिला बेहतर उत्पादन
कृषक गौरव कुठारे बताते हैं कि वे पारंपरिक धान की खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपने 1.60 हेक्टेयर प्रक्षेत्र में वर्षभर टमाटर, बैंगन, सेम एवं गेंदा जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं। ड्रिप और मल्चिंग जैसी नवीन तकनीकों के उपयोग से उन्हें उत्पादन लागत नियंत्रित करने के साथ बेहतर उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
योजना से मिली खेती को नई राह
कुठारे ने बताया कि पूर्व में वे मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू करने के बाद उन्हें उत्पादन एवं बाजार मूल्य के बेहतर अवसर मिले। वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के घटक ग्राफ्टेड बैंगन, टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन के अंतर्गत उन्हें एक एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन फसल के लिए 30 हजार रुपए का अनुदान डीबीटी के माध्यम से प्राप्त हुआ।23 टन उत्पादन से बदली खेती की तस्वीर
कृषक गौरव बताते हैं कि ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से उन्हेे करीब 23 टन उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसका विक्रय लगभग 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किया गया। इससे उन्हें लगभग 2 लाख 65 हजार रुपए की सकल आमदनी प्राप्त हुई। ड्रिप, मल्चिंग एवं कृषि यंत्रों के उपयोग से उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में भी सहायता मिली। यह सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। वे स्वयं अन्य कृषकों को भी पारंपरिक धान की खेती के साथ सब्जी एवं अन्य उद्यानिकी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।