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नीट सॉल्वर गैंग का बड़ा पर्दाफाश
नीट सॉल्वर गैंग का बड़ा पर्दाफाश
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लखीसराय में नीट सॉल्वर गैंग का बड़ा पर्दाफाश: बायोमेट्रिक सिस्टम में लगाई थी सेंध, मेडिकल छात्र ही निकले मास्टरमाइंड

बिहार के लखीसराय में नीट यूजी परीक्षा के दौरान पकड़े गए सॉल्वर गैंग को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने परीक्षा पास कराने के लिए परीक्षा केंद्रों की बायोमेट्रिक जांच व्यवस्था को ही हैक कर लिया था। गिरोह ने अंगूठे का निशान और चेहरा मिलाने वाली मशीन के कर्मचारियों को अपने साथ मिलाया और असली छात्रों की जगह सॉल्वरों (फर्जी छात्रों) को आसानी से एंट्री दिला दी। इस खेल का मास्टरमाइंड पावापुरी मेडिकल कॉलेज का एक छात्र है। पुलिस अब तक 30 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

विशेष संवाददाता
22 Jun 2026, 12:34 PM
लखीसराय

बिहार के लखीसराय जिले में रविवार को नीट यूजी परीक्षा के दौरान पकड़े गए सॉल्वर गैंग को लेकर हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस गिरोह के तार गहरे जुड़ते जा रहे हैं। पूछताछ में यह साफ हुआ है कि इस गैंग ने परीक्षा को पास कराने के लिए परीक्षा केंद्रों पर होने वाली बायोमेट्रिक जांच की पूरी व्यवस्था को ही हैक कर लिया था।

अंगूठे के निशान वाली मशीन में ऐसे की हेराफेरी

सरल शब्दों में समझें तो बायोमेट्रिक सत्यापन (biometric verification) एक ऐसी तकनीक है जिसमें परीक्षा देने वाले असली छात्र के अंगूठे का निशान या चेहरा मशीन से मिलाया जाता है ताकि कोई फर्जी छात्र न बैठ सके। लेकिन इस गिरोह ने इस जांच को करने वाले कर्मचारियों को ही अपने साथ मिला लिया था। कर्मचारियों की मिलीभगत से असली छात्रों की जगह पर दूसरे तेजतर्रार लड़कों (सॉल्वरों) को बिना किसी रोक-टोक के परीक्षा हॉल के अंदर एंट्री दिला दी गई।

पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र है गैंग का बॉस

पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस पूरे खेल का मुख्य संचालक रविशंकर नाम का युवक है, जो खुद पावापुरी मेडिकल कॉलेज राजगीर का छात्र है। रविशंकर ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले होनहार छात्रों का एक नेटवर्क तैयार किया था। इन छात्रों को पैसों का लालच देकर सॉल्वर बनाया गया था। गैंग ने ऐसे अमीर परिवारों के बच्चों को अपना शिकार बनाया जो मेडिकल कॉलेज में एडमिशन (medical college admission) के लिए मोटी रकम देने को तैयार थे।


पटना के मेडिकल छात्र ने बदला अपना रूप

इस मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पटना मेडिकल कॉलेज का चौथी साल का छात्र मयंक कश्यप, जो हाजीपुर का रहने वाला है, उसने अंकित कुमार नाम के व्यक्ति की फर्जी पहचान पर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में नौकरी ज्वाइन की थी। मयंक ने ही केंद्र के अंदर सॉल्वरों को आसानी से प्रवेश दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। पुलिस ने अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें 9 मेडिकल छात्र, बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारी और एक असली छात्र शामिल है।

एक-एक छात्र से 12 लाख का सौदा

लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि हर एक उम्मीदवार से परीक्षा पास कराने के लिए 10 से 12 लाख रुपये की डील हुई थी। इसमें से 1 से 2 लाख रुपये एडवांस (advance payment) के तौर पर लिए गए थे और बाकी के पैसे एडमिशन होने के बाद मिलने थे। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल फोन की जांच कर रही है। केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

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