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म्यूल अकाउंट गिरोह से जुड़े 3 आरोपी गिरफ्तार
म्यूल अकाउंट गिरोह से जुड़े 3 आरोपी गिरफ्तार
दुर्ग

कार्रवाई  : ‘म्यूल अकाउंट’ गिरोह से जुड़े 3 आरोपी गिरफ्तार, 99 संदिग्ध खातों की जांच जारी

दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। नेवई थाना पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम के लेन-देन और निकासी के लिए किया जाता था।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
14 Jun 2026, 01:09 PM
दुर्ग

दुर्ग पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गएम्यूल अकाउंटनेटवर्क का खुलासा किया है। नेवई थाना पुलिस ने ऐसे तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेज उपलब्ध कराकर अवैध कमाई कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल पर प्राप्त साइबर शिकायतों और संदिग्ध बैंक खातों के विश्लेषण के दौरान कई खातों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। जांच में सामने आया कि इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से हासिल रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर करने और नकदी निकालने के लिए किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की।

2024 से 2026 तक लाखों रुपये का संदिग्ध लेन-देन

विस्तृत जांच के दौरान बैंक खातों के केवाईसी दस्तावेज, ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले गए। जांच में पता चला कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम का बड़े पैमाने पर लेन-देन हुआ। पुलिस को लाखों रुपये के संदिग्ध और अनधिकृत ट्रांजेक्शन के प्रमाण मिले हैं, जिसके आधार पर कार्रवाई तेज कर दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कुल 99 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क साइबर अपराधियों को आर्थिक गतिविधियों में मदद पहुंचाने का संगठित माध्यम बन चुका था। जांच के दायरे में आने वाले अन्य खाताधारकों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

तीन आरोपियों की संलिप्तता हुई प्रमाणित

विवेचना के दौरान पवन दास मानिकपुरी, करण रंगारी और नरेन्द्र कुमार साहू की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई। पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम साइबर ठगी से जुड़े लोगों को उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ प्राप्त होता था। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड तथा बैंक खातों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर पुलिस साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

साइबर अपराध के खिलाफ अभियान रहेगा जारी

दुर्ग पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी में सहयोग करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या मोबाइल सिम उपयोग के लिए दें, क्योंकि ऐसा करना कानूनन अपराध है और इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

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