जिले के विभिन्न मंदिरों में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं को लेकर मंदिर महासंघ, जिला महासमुंद ने गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया है। महासंघ के प्रमुख संयोजक दाऊलाल चंद्राकर, दानवीर शर्मा, डॉ. नीरज गजेंद्र एवं ईश्वर सिन्हा ने संयुक्त रूप से जारी बयान में कहा कि हाल ही में पिथौरा स्थित परमेश्वरी मंदिर में हुई चोरी की घटना ने न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को आहत किया है, बल्कि जिले के मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
संयोजक मंडल के प्रमुख संयोजक दाऊलाल चंद्राकर ने कहा कि नगर के मुख्य मार्ग पर स्थित एक प्रमुख मंदिर में चोरी होना अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस का परिचायक है। मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक चेतना के केंद्र हैं। ऐसे पवित्र स्थलों को निशाना बनाना समाज की धार्मिक भावनाओं पर प्रत्यक्ष आघात है।
अनेक मंदिर चोरी की घटना
महासंघ ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में जिले के अनेक मंदिर चोरी की घटनाओं का शिकार हुए हैं। दुर्भाग्यवश इनमें से कई मामलों का आज तक पूर्ण खुलासा नहीं हो पाया है, जिससे मंदिर समितियों, श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों के बीच असुरक्षा और चिंता का वातावरण निर्मित हो रहा है।
डॉ. नीरज गजेंद्र ने कहा कि पिथौरा की ताजा घटना के संबंध में सामने आ रही जानकारियों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। चोरी एवं अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त तत्वों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए तथा ऐसे अपराधियों पर निरंतर निगरानी रखी जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मंदिर महासंघ ने पुलिस अधीक्षक, महासमुंद से मांग की है कि पिथौरा स्थित परमेश्वरी मंदिर चोरी प्रकरण का शीघ्र खुलासा कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही जिले में पूर्व में मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं की पुनः समीक्षा कर लंबित मामलों का भी निराकरण किया जाए। महासंघ ने प्रमुख मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने, नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने तथा संवेदनशील मंदिर परिसरों में विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है।
महासंघ के पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि पुलिस प्रशासन इस विषय की गंभीरता को समझते हुए त्वरित एवं ठोस कदम उठाएगा, जिससे मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और श्रद्धालुओं का विश्वास एवं आस्था अक्षुण्ण बनी रहे।