15 साल की नाबालिग बनी मां, अस्पताल से पुलिस तक पहुंचा मामला, 25 वर्षीय युवक गिरफ्तार
महासमुंद के तुमगांव थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय नाबालिग से कथित दुष्कर्म के मामले में 25 वर्षीय युवक गिरफ्तार हुआ है। अस्पताल में नाबालिग के बच्चे को जन्म देने के बाद मामला सामने आया।
जिले के तुमगांव थाना इलाके से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 15 साल की एक नाबालिग के साथ लगातार गलत काम (दुष्कर्म) किए जाने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी की पहचान ग्राम खैरझिटी निवासी 25 वर्षीय ज्ञानेश्वर गेण्ड्रे के रूप में हुई है। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब नाबालिग ने अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। जानकारी के मुताबिक, 12 अगस्त को नाबालिग को प्रसव के लिए जिला अस्पताल महासमुंद में भर्ती कराया गया था।
एफआईआर के बाद गिरफ्तार हुआ आरोपी
जन्म के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कानूनन इसकी सूचना पुलिस को दी। महासमुंद पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत जीरो पर रिपोर्ट दर्ज की और केस तुमगांव थाना ट्रांसफर कर दिया। 15 अगस्त को औपचारिक एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने दबिश देकर आरोपी को उसके घर से धर दबोचा और अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि मूल रूप से खैरझिटी का रहने वाला आरोपी ज्ञानेश्वर काम के सिलसिले में रायपुर में रहता था। वहीं उसकी पहचान नाबालिग से हुई। इसके बाद दोनों साथ रहने लगे, जिस दौरान नाबालिग गर्भवती हो गई।
नाबालिग से दुष्कर्म पर कठोर सजा का प्रावधान
डिलीवरी का वक्त पास आने पर आरोपी उसे वापस अपने गांव ले आया था। मामले पर कानूनी बारीकियों को साझा करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय के अधिवक्ता शैलेश अग्रवाल ने बताया कि आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)(m) और 65(1) लगाई गई हैं। धारा 64(2)(m) एक ही पीड़िता से बार-बार दुष्कर्म के मामलों में लागू होती है, वहीं धारा 65(1) के तहत 16 वर्ष से कम उम्र की बालिका से दुष्कर्म करने पर बेहद कठोर सजा का प्रावधान है।
जच्चा-बच्चा कार्ड और सीएम पोर्टल की शिकायत से खुले राज
सीएम पोर्टल पर बाल विवाह की शिकायत: 12 अगस्त को ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर इस मामले से जुड़ी बाल विवाह की एक शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद 14 अगस्त को महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम गांव पहुंची। जांच में सामाजिक रीति-रिवाज से शादी की पुष्टि तो नहीं हुई, लेकिन गांव की मितानिनों से लड़की के गर्भवती होने की बात सामने आई।
कार्ड में पति-पत्नी का नाम: स्थानीय सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के जच्चा-बच्चा कार्ड में आरोपी और नाबालिग को पति-पत्नी के रूप में दर्ज किया गया है। गांव में दोनों के प्रेम संबंध और शादी की चर्चाएं भी हैं, हालांकि पुलिस का कहना है कि इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।
बाल विवाह रोकने के दावे फेल
इस पूरी घटना ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यदि सीएम पोर्टल पर शिकायत न होती और प्रसव अस्पताल के बजाय घर पर हुआ होता, तो शायद यह बाल अपराध कभी सामने ही नहीं आ पाता। विभाग की ओर से बाल विवाह रोकने और जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने को लेकर जो दावे किए जाते हैं, यह मामला उसकी पोल खोलता नजर आ रहा है। फिलहाल तुमगांव पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।