छत्तीसगढ़ में जारी बहुचर्चित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच गुरुवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम ने धमतरी स्थित कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के सिहावा रोड स्थित निवास पर दबिश दी। सुबह लगभग सात बजे दो वाहनों में पहुंचे ईडी के अफसरों के साथ सुरक्षा बलों के सशस्त्र जवान भी तैनात रहे।
काफी समय से केंद्रीय जांच एजेंसियों के दायरे में
करीब आठ सदस्यों वाली यह टीम घर के भीतर वित्तीय दस्तावेजों, लेन-देन के हिसाब और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी है। सुरक्षा के लिहाज से परिसर के बाहर कड़ा पहरा तैनात किया गया है। इसके साथ ही, रायपुर में भी अग्रवाल से जुड़े कुछ अन्य संभावित ठिकानों पर एजेंसी की समानांतर जांच की खबरें सामने आ रही हैं। रामगोपाल अग्रवाल पिछले काफी समय से केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं।
आधिकारिक बयान जारी नहीं
दिलचस्प बात यह है कि वह बीते लगभग तीन सालों से किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम या मंच पर नजर नहीं आए हैं। इस दौरान उनके देश में रहने या विदेश जाने को लेकर लगातार तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं। माना जा रहा है कि ईडी की यह नई दबिश इसी लंबे समय से चल रही जांच की एक अगली कड़ी है। हालांकि, इस पूरे सर्च ऑपरेशन को लेकर एजेंसी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान या ब्योरा जारी नहीं किया गया है।
कमीशनखाेरी से सरकार को हुआ भारी नुकसान
राज्य में शराब, कोयला परिवहन और कस्टम मिलिंग में कथित अनियमितताओं की समानांतर जांच ईडी और राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियों के दावों के अनुसार, साल 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब वितरण प्रणाली में एक कथित सिंडिकेट के जरिए अवैध बिक्री और कमीशनखोरी का खेल चला, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।कई बड़ी हस्तियों की भूमिका पर सवाल
एजेंसियों ने इस पूरे कथित नेटवर्क में लगभग 3,200 करोड़ रुपये के वित्तीय हेरफेर का अनुमान जताया है। जांच के सिलसिले में अब तक कई प्रशासनिक अधिकारियों, आबकारी विभाग के अफसरों, कारोबारियों और राजनीतिक हस्तियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है और मामला फिलहाल अदालत व जांच एजेंसियों के समक्ष विचाराधीन है।