आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित दिनचर्या के कारण पीठ और जोड़ों का दर्द तेजी से आम समस्या बनता जा रहा है। पहले जहां यह परेशानी बढ़ती उम्र के लोगों में अधिक देखी जाती थी, वहीं अब युवा वर्ग भी इससे प्रभावित हो रहा है। अधिकांश लोग दर्द होने पर पेनकिलर या घरेलू उपायों का सहारा लेकर अस्थायी आराम पा लेते हैं, लेकिन कई बार लगातार बना रहने वाला दर्द शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर केवल सामान्य जांच पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए MRI मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग कराने की सलाह देते हैं। यह जांच शरीर के अंदर मौजूद हड्डियों, नसों, मांसपेशियों और ऊतकों की विस्तृत तस्वीर उपलब्ध कराती है।
MRI जांच
MRI एक आधुनिक मेडिकल इमेजिंग तकनीक है, जिसमें शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की स्पष्ट तस्वीर तैयार की जाती है इसमें किसी प्रकार की एक्स-रे रेडिएशन का उपयोग नहीं किया जाता यह जांच मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी, गर्दन, घुटनों, कंधों, जोड़ों और नसों से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने में किया जाता है डॉक्टर इसके जरिए यह समझ पाते हसी हैं कि दर्द का कारण केवल मांसपेशियों का खिंचाव है या कोई बड़ी समस्या मौजूद है।
कब कराए MRI
यदि पीठ का दर्द लगातार कई दिनों तक बना रहता है और सामान्य दवाओं या आराम करने पर भी ठीक नहीं होता, तो डॉक्टर MRI कराने की सलाह देते हैं कई बार रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, जिसे स्लिप डिस्क कहा जाता है इससे नसों पर दबाव पड़ता है और दर्द बढ़ जाता है MRI के माध्यम से इस स्थिति का स्पष्ट पता लगाया जाता है। यदि कमर दर्द के साथ पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होने लगे तो यह नसों पर दबाव का संकेत हो सकता है इसी तरह गर्दन के दर्द के साथ हाथों में कमजोरी या झनझनाहट होने पर भी डॉक्टर MRI कराने की सलाह देते हैं। ऐसी स्थिति में समय रहते जांच करवाना जरूरी माना जाता है।
हर दर्द में MRI जरूरी है
हर प्रकार के पीठ या जोड़ों के दर्द में MRI कराने की आवश्यकता नहीं होती है सामान्य मांसपेशियों के दर्द, हल्की मोच या कुछ दिनों तक रहने वाली तकलीफ अक्सर आराम, व्यायाम और दवाओं से ठीक हो जाती है। MRI की सलाह आमतौर पर तब दी जाती है जब दर्द लंबे समय तक बना रहे या कोई गंभीर लक्षण दिखाई दें लंबे समय तक दर्द को नजरअंदाज करने से समस्या बढ़ सकती है। यदि नसों, डिस्क या जोड़ों में कोई गंभीर गड़बड़ी हो और उसका समय पर पता न चले तो भविष्य में चलने-फिरने या दैनिक कार्यों में कठिनाई हो सकती है। इसलिए लगातार रहने वाले दर्द को केवल पेनकिलर से दबाने के बजाय उसके कारण की जांच करवाना बेहद जरुरी है।
