Mushroom Farming: सारंगढ़ की मिथिला ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह, अब हर माह कमा रही 50 हजार रूपए
Mushroom Farming: सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के खोरीगांव की मिथिला नायक ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर मशरूम उत्पादन शुरू किया। करीब 1.50 लाख रुपए की शुरुआती पूंजी से शुरू हुआ यह कारोबार अब उन्हें हर माह लगभग 50 हजार रुपए की आमदनी दे रहा है। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बनी है।
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कीर्तिमान डेस्क | धनेश्वरी साहू
07 Sep 2026, 03:38 PM
रायपुर
Mushroom Farming: पारंपरिक कृषि पर निर्भरता से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ने वाली ग्रामीण महिलाओं की सूची में अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी का नाम भी जुड़ गया है। अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और शासकीय योजनाओं के सही क्रियान्वयन के बदौलत मिथिला दीदी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही हैए उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी हैए जिनके लिए मशरूम उत्पादन की खेती वरदान साबित हुई है।
शुरुआत में परिवार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे घर का खर्च चलाना कठिन हो रहा था। इस चुनौती से निपटने के लिए मिथिला दीदी ने अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।
मशरूम की खेती से बदली मिथिला की जिंदगी, अब हर माह 50 हजार की कमाई1 लाख 50 हजार रूपए की शुरुआती पूंजी से सफर का आगाज
मशरूम उत्पादन का व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने सखी क्लस्टर संगठन से ऋण 1 लाख 20 हजार रूपए, अपनी व्यक्तिगत बचत से 30 हजार रूपए इस प्रकार कुल शुरुआती लागतरू 1 लाख 20 हजार रूपए से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू की। शुरुआती दौर में यह कार्य नया था, लेकिन सीखने की ललक और निरंतर प्रयासों से जल्द ही मशरूम उत्पादन एक सफल आजीविका गतिविधि में बदल गया। शुरुआती दौर में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई समस्याएं सामने आईं। लेकिन मिथिला दीदी ने प्रशिक्षण लेकर और आपसी सहयोग से इन सभी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।
हर माह 50 हजार रूपए की आय और प्रेरणादायक पहल
बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन के चलते स्थानीय बाजारों में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी। वर्तमान में मिथिला दीदी अपने घर से ही मशरूम उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बेचती हैं और प्रतिमाह लगभग 50 हजार रूपए की आमदनी अर्जित कर रही हैं। उनकी यह सफलता आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है।
सुशासन नीति और बेहतर मॉनिटरिंग का परिणाम
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन की सतत् मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन से सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर गढ़ रही हैं। आज आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए यह संदेश दे रही है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।