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Nana Patekar bade farewell to the world (Image Source: Keertiman Media)
Nana Patekar bade farewell to the world (Image Source: Keertiman Media)
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Nana Patekar: आंखें नम, दिल उदास...जिस आवाज से गूंजता था पर्दा, आज वही आवाज हमेशा के लिए खामोश

Nana Patekar: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के चलते निधन हो गया। गोवा स्थित उनके आवास पर तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। दमदार आवाज, बेहतरीन अभिनय और यादगार किरदारों के लिए मशहूर नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी। तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित नाना के निधन से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 08 Oct 2026, 09:01 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
मुंबई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Nana Patekar: हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी कड़क आवाज, अनूठे अभिनय और डायलॉग डिलीवरी से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया। 75 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

सुबह अचेत हालत में मिले थे नाना 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 5:20 बजे नाना पाटेकर को उनके गोवा वाले घर में अचानक अचेत (बेहोश) अवस्था में पाया गया। परिजनों और घर के स्टाफ ने तुरंत स्थिति संभाली और उन्हें निकटतम मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की। लगातार 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर (CPR) दिया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस मामले को फिलहाल मेडिको-लीगल केस (MLC) के तहत दर्ज किया गया है और नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

थिएटर से शुरू हुआ सफर, बने अभिनय के शिखर 

1:12:1951 को जन्मे नाना पाटेकर (असली नाम विश्वनाथ पाटेकर) ने अपने करियर की शुरुआत मराठी रंगमंच और थिएटर से की थी। साल 1978 में आई फिल्म 'गमन' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रहार, अंगार, तिरंगा, क्रांतिवीर, खामोशी और अब तक छप्पन जैसी फिल्मों में निभाए गए उनके किरदारों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। गंभीर भूमिकाओं के साथ-साथ उन्होंने कॉमेडी में भी लोहा मनवाया; 'वेलकम' फिल्म में उनके 'मजनू भाई' के किरदार ने हर उम्र के दर्शक को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया।

राष्ट्रीय पुरस्कारों से पद्मश्री तक का शानदार सफर

नाना पाटेकर उन गिने-चुने कलाकारों में शामिल थे जिन्हें अभिनय के तीनों प्रमुख राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से नवाजा गया:

  • परिंदा (1989): 'अन्ना' के नेगेटिव और खौफनाक किरदार के लिए पहला बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड।

  • क्रांतिवीर (1994): 'प्रताप' के दमदार किरदार के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड।

    • ग्निसाक्षी (1996): बेहतरीन अभिनय प्रदर्शन के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड।

    भारतीय कला और सिनेमा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 2013 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से अलंकृत किया था।

  • सामाजिक सरोकारों से जुड़े थे 'नाना' 

    नाना केवल एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक बेहद उदार और संवेदनशील इंसान भी थे। उन्होंने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों की मदद के लिए 'नाम फाउंडेशन' (NAAM Foundation) की स्थापना की थी। वे फिल्मों से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सीधे किसानों और जरूरतमंदों के कल्याण में लगाते थे। उनका यह सादगीभरा और मददगार रवैया उन्हें आम जनता के बीच भी बेहद प्रिय बनाता था। नाना पाटेकर के अचानक चले जाने से भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे अध्याय का अंत हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर बॉलीवुड और राजनीतिक गलियारों तक, हर कोई इस महान कलाकार को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दे रहा है।
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