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किसान धनेश्वर प्रसाद का जैविक खेती नवाचार
किसान धनेश्वर प्रसाद का जैविक खेती नवाचार
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नई मिसाल : अम्बिकापुर के किसान बने जैविक खेती के प्रेरणास्रोत

सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत लब्जी और नावापारा के प्रगतिशील किसान धनेश्वर प्रसाद ने रासायनिक खेती को छोड़कर पूरी तरह जैविक खेती अपनाई है। 6 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले धनेश्वर ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में मिट्टी परीक्षण कराया, जिसमें नाइट्रोजन की कमी पाई गई।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
03 Jun 2026, 10:19 AM
रायपुर

सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लब्जी और नावापारा में प्रगतिशील किसान धनेश्वर प्रसाद ने खेती में एक सकारात्मक बदलाव की दिशा चुनी है। 6 एकड़ कृषि भूमि के मालिक धनेश्वर अब पूरी तरह रासायनिक खादों को छोड़कर जैविक खेती की ओर बढ़ चुके हैं। उनका यह कदम क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है। धनेश्वर प्रसाद ने बताया कि पहले वे अपनी फसलों में लगातार रासायनिक खादों का उपयोग करते थे, जिससे हर साल खाद की मात्रा बढ़ानी पड़ती थी और मिट्टी की उर्वरता तेजी से घट रही थी। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कृषि विस्तार विभाग से संपर्क कर मिट्टी परीक्षण कराया, जिसमें नाइट्रोजन की कमी पाई गई। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने उन्हें ‘नील हरित शैवाल’ (Blue-Green Algae) के उपयोग की तकनीकी सलाह दी।

नील हरित शैवाल उत्पादन

कृषि विभाग के मार्गदर्शन को अपनाते हुए धनेश्वर प्रसाद ने अपने घर के बाड़ी में ही एक टैंक बनाकर नील हरित शैवाल का उत्पादन शुरू किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रयास से लगभग 25 किलो शैवाल तैयार होने की संभावना है। इसे खेतों में डालने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की पूर्ति होगी और भूमि की सेहत में सुधार आएगा। धनेश्वर प्रसाद का कहना है कि जैविक खेती सिर्फ वर्तमान फसल के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है, पोषक तत्व संरक्षित रहते हैंअसली समस्या की परत

किसान धनेश्वर प्रसाद ने बताया कि पहले वे लंबे समय तक रासायनिक खादों पर निर्भर थे, जिससे हर साल खाद की मात्रा बढ़ानी पड़ती थी और जमीन की उपजाऊ क्षमता लगातार कम हो रही थी। स्थिति को समझने के लिए उन्होंने कृषि विस्तार विभाग से संपर्क कर मिट्टी परीक्षण कराया, जिसमें नाइट्रोजन की कमी पाई गई। इसके बाद विशेषज्ञों ने उन्हें नील हरित शैवाल (Blue-Green Algae) आधारित खेती अपनाने की सलाह दी।

प्राकृतिक खाद का उत्पादन

विभागीय मार्गदर्शन के बाद धनेश्वर प्रसाद ने नवाचार करते हुए अपने घर की बाड़ी में एक टैंक तैयार किया और नील हरित शैवाल का उत्पादन शुरू किया। उन्होंने बताया कि इससे लगभग 25 किलो शैवाल तैयार होने की संभावना है, जिसे खेतों में उपयोग करने से मिट्टी में प्राकृतिक नाइट्रोजन की आपूर्ति होगी और भूमि की गुणवत्ता में सुधार आएगा। धनेश्वर प्रसाद का कहना है कि जैविक खेती केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा का माध्यम है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता भी संतुलित रहती है। साथ ही रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में भी कमी आती है।

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