छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने राज्य में नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोक-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक जानकारी या प्रशासनिक जटिलता के अभाव में सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए।
बस्तर की सफलता
इस महा-अभियान की नींव बस्तर संभाग के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में संचालित 'नियद नेल्लानार' योजना की शानदार सफलता पर रखी गई है। बस्तर के गांवों में बुनियादी सुविधाएं और सरकारी योजनाएं पहुंचाने के इस सफल मॉडल को पहले 'नियद नेल्लानार 2.0' के रूप में 10 जिलों में विस्तारित किया गया। अब इसी 'कन्वर्जेंस मॉडल' (विभागीय समन्वय) को और अधिक व्यापक बनाते हुए प्रदेश के शेष 23 जिलों में 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान के रूप में लागू किया जा रहा है।
इन 23 जिलों में युद्ध स्तर पर चलेगा अभियान
यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के ग्रामीण और शहरी अंचलों में पूरी ताकत से संचालित किया जाएगा:
रायपुर संभाग: रायपुर, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार-भाटापारा।
बिलासपुर संभाग: बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही और सारंगढ़-बिलाईगढ़।
दुर्ग संभाग: दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा) और राजनांदगांव।
सरगुजा संभाग: सरगुजा, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर।
कलेक्टर्स पर बड़ी जिम्मेदारी
खुशहाल और 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' की ओर ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, यह अभियान केवल सरकारी आंकड़ों को बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का महायज्ञ है। जब शासन की योजनाएं बिना किसी बिचौलिए के सीधे हकदार तक पहुंचेंगी, तभी राज्य के विकास की यात्रा समावेशी बनेगी और 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' के साथ 'विकसित छत्तीसगढ़' का सपना धरातल पर सच होगा।