राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार गतिरोध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर आने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के न्यौते को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने संवाद की पहल की थी, लेकिन CJP नेताओं के सख्त रुख ने इस विवाद को सुलझाने के बजाय और उलझा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर पर बढ़ते जनसैलाब और प्रदर्शन के तेवरों को देखते हुए मोदी सरकार इस पूरे मामले का जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान चाहती है।
असामाजिक तत्व भावनाओं का उठा रहे फायदा
इसी कड़ी में नड्डा ने बीते दिनों सोनम वांगचुक से लगभग 45 मिनट तक गहन चर्चा की थी। इस बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नड्डा ने स्पष्ट कहा था कि, "सीजेपी के प्रतिनिधि जब भी चाहें, सरकार उनके साथ चर्चा के लिए दरवाजे खुले रखे हुए है।" हालांकि, सरकार के रुख के साथ-साथ बयानों का दौर भी तेज है। कई अन्य नेताओं का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व जनता की भावनाओं का फायदा उठाकर इस आंदोलन को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार की इस पेशकश के बाद CJP ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है।
जंतर-मंतर पर एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा:
"पुलिस के जरिए हमें संदेश मिला था कि जे.पी. नड्डा ने हमें अपने आधिकारिक आवास पर चर्चा के लिए बुलाया है। हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हम किसी मंत्री के घर या दफ्तर में जाकर बात नहीं करेंगे। अगर सरकार वास्तव में बातचीत को लेकर गंभीर है, तो उन्हें किसी न्यूट्रल (निष्पक्ष) जगह पर आना होगा या फिर खुद जंतर-मंतर आकर हमारे बीच बात करनी होगी।"
जंतर-मंतर पर तनाव का माहौल
CJP की इस शर्त और कड़े तेवरों के बाद अब गेंद पूरी तरह से सरकार के पाले में है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार का कोई प्रतिनिधि या बड़ा नेता आंदोलनकारियों की शर्त मानकर जंतर-मंतर पहुंचेगा, या फिर बातचीत की यह कोशिश एक बार फिर किसी नतीजे के बिना ही दम तोड़ देगी? फिलहाल, जंतर-मंतर पर तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।