Odisha Student Protes: स्कूली किताबों की छपाई में हुई भारी गड़बड़ियों को लेकर सड़कों पर उतरा छात्रों का गुस्सा अब विकराल रूप लेता जा रहा है। पिछले कई दिनों से जारी इस विरोध-प्रदर्शन को अब राजनीतिक मोर्चे पर भी बड़ा सहारा मिल गया है। नवनिर्माण युवा छात्र संगठन (NYCS) के इस आंदोलन के समर्थन में अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी खुलकर मैदान में आ गई है। सोमवार को CJP के प्रवक्ता और सह-संयोजक सौरव दास खुद भुवनेश्वर पहुंचे और धरना दे रहे छात्रों से मुलाकात कर आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
380 करोड़ के बजट पर उठाए सवाल, जांच और इस्तीफे की मांग
आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे सौरव दास ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि स्कूली किताबों की छपाई के नाम पर जनता के करीब 380 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन इसके बावजूद बच्चों के हाथों में गलतियों से भरी पुस्तकें थमा दी गईं। यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषियों की जवाबदेही तय करने और स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के तुरंत इस्तीफे की मांग की।
सड़कों पर बैठने को मजबूर छात्र, सरकार की बेरुखी कायम
दास ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्र संगठन अपनी जायज मांगों के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी तबीयत बिगड़ रही है, लेकिन सरकार का रवैया बेहद संवेदनहीन बना हुआ है। अब तक प्रशासन की तरफ से बातचीत की कोई पहल नहीं की गई है, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है। CJP ने साफ किया है कि वे स्कूली शिक्षा में सुधार, समय पर सही किताबों की उपलब्धता और गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होने तक पीछे नहीं हटेंगे। पार्टी जल्द ही छात्रों के साथ बैठकर आगे की रणनीति बनाएगी।NEET-UG विवाद से तुलना, आज विधानसभा का घेराव
राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को जोड़ते हुए सौरव दास ने NEET-UG परीक्षा विवाद की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जिस तरह राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठी थी, ठीक उसी तरह ओडिशा में भी इस बड़ी चूक का जिम्मा राज्य सरकार को लेना होगा। इस बीच, अपनी मांगों को लेकर आर-पार के मूड में आ चुके छात्र संगठनों ने आज (22 सितंबर) ओडिशा विधानसभा के घेराव का आह्वान किया है। छात्रों का कहना है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय किए बिना यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस-प्रशासन सतर्क मोड पर है।

